सीहोर : कुबेरेश्वरधाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव आरंभ, 29 जुलाई को गुरु दीक्षा, 10 लाख श्रद्धालु आगमन की उम्मीद
सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के पहले ही दिन देशभर से डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कथा श्रवण, दर्शन और सेवा भावना के साथ यहां पहुंचे। 24 से 28 जुलाई तक शिव महापुराण कथा तथा 29 जुलाई को गुरु दीक्षा महोत्सव का आयोजन होगा। पूरे आयोजन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिसे देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की हैं।
भक्ति और श्रद्धा से सराबोर पहला दिन
महोत्सव के पहले दिन कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। कथा पंडाल, दर्शन स्थल और प्रसादी व्यवस्था केंद्रों पर भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित नजर आईं। श्रद्धालुओं के चेहरों पर गुरु पूर्णिमा के प्रति आस्था और शिव महापुराण श्रवण का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। पहले दिन का यह जनसैलाब आयोजन की विशालता और धाम की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
छह दिन तक चलेगा आध्यात्मिक आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार, गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत 24 से 28 जुलाई तक शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है, जबकि 29 जुलाई को एक दिवसीय गुरु दीक्षा महोत्सव होगा। इस छह दिवसीय धार्मिक आयोजन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए धाम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात, सुरक्षा, भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ये भी पढ़ें: सीहोर : कुबेरेश्वर धाम में घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल पकड़ा, 5 सिलेंडर जब्त
भोजन प्रसादी के लिए बड़े इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजन समिति ने भोजन प्रसादी वितरण की विशेष व्यवस्था की है। करीब पांच एकड़ से अधिक भूमि पर भंडारे और प्रसादी वितरण के केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगातार श्रद्धालुओं को भोजन कराया जा रहा है। पहले दिन ही 10 क्विंटल से अधिक नुक्ति प्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद प्रसादी व्यवस्था सुचारु रही, जिससे समिति की तैयारी और प्रबंधन क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन हुआ।
5000 से अधिक सेवादार सेवा में जुटे
महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक देशभर से आए 5,000 से अधिक सेवादारों की निस्वार्थ सेवा है। ये सेवादार भंडारे की व्यवस्था, भोजन प्रसादी वितरण, श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन, भीड़ प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं में पूरे समर्पण के साथ जुटे हुए हैं। सेवा की यह भावना आयोजन को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी विशेष बनाती है। श्रद्धालु भी इन सेवाभावी कार्यकर्ताओं की सराहना करते दिखाई दिए।
विद्यार्थियों ने पेश की सेवा की मिसाल
महोत्सव में हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से आए आईटी और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। ये विद्यार्थी श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन साफ करने, भोजन प्रसादी बांटने और अन्य व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते नजर आए। युवा पीढ़ी की यह सहभागिता आयोजन का भावनात्मक और प्रेरक पक्ष बनकर उभरी। श्रद्धालुओं ने भी इन विद्यार्थियों की विनम्रता और निस्वार्थ सेवा भावना की खुले दिल से प्रशंसा की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया विश्वास का संदेश
शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु पर भरोसा मत करो, लेकिन गुरु के शब्दों और वचनों पर पूर्ण विश्वास करो। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को बदलने की शक्ति रखने वाली दिव्य पोथी है। उन्होंने भक्ति से अधिक विश्वास की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, तो भगवान उसकी सहायता अवश्य करते हैं।
ये भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026 : 14 या 15 अगस्त... कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें किस के लिए खास है ये व्रत
द्रौपदी प्रसंग से समझाया आस्था का बल
कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि संकट की घड़ी में जब द्रौपदी ने अंततः भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया, तब भगवान ने उसकी रक्षा की। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक संकट में भगवान का स्मरण और अटूट विश्वास ही सबसे बड़ा सहारा है। व्यासपीठ से अनेक श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए अनुभव-पत्रों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें शिव नाम के जप और जल अर्पण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की बात कही गई।
राघव मिश्रा के भजनों से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने भी अपने मधुर भजनों और संबोधन से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि गुरु, माता-पिता और भगवान ऐसे आधार हैं, जिनके सान्निध्य में व्यक्ति के दुख दूर होते हैं। इन पर विश्वास और सत्संग का मार्ग जीवन को सही दिशा देता है।
















