Hariyali Teej 2026 :14 या 15 अगस्त... कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें किस के लिए खास है ये व्रत

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने में कई बड़े व्रत और त्योहार आते हैं। इन्हीं में से एक है हरियाली तीज, जिसका इंतजार खासतौर पर सुहागिन महिलाएं करती हैं। हर साल इसकी तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है। इस बार भी कई लोग जानना चाहते हैं कि हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी या 16 अगस्त को। तो चलिए जानते है इसकी सही तिथि।
हर साल सावन मास में कई व्रत और त्योहार आते हैं इसी माहीने से सावन सोमवार की भी शुरुआत होती है, वहीं सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि के दिन ही हरियाली तीज भी मनाई जाती है, ये बहुत खास और पवित्र व्रत होता है, जिसे सुहागिन महिलाएं बहुत महत्वपूर्ण मानती हैं और अपने पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में सुख शांति और समृद्धि के लिए इसका व्रत रखती हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि हरियाली तीज को इतना खास क्यों माना जाता है, नहीं तो आइए जानते है।
2026 में कब रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत?
पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज की तृतीया तिथि 15 अगस्त से शुरू होकर 16 अगस्त तक रहेगी। हालांकि, व्रत रखने के लिए उदया तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है। इसी कारण कई पंचांगों के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, जबकि कुछ जगहों पर पूजा और पर्व का उत्सव 16 अगस्त को भी मनाया जा सकता है। ऐसे में अपने क्षेत्र की परंपरा या स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि का पालन करना सबसे सही माना जाता है।
क्यों रखा जाता है हरियाली तीज का व्रत?
हरियाली तीज का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं।
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है यह परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी घटना की याद में हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। यह पर्व प्रेम, विश्वास, धैर्य और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन कैसे की जाती है पूजा?
हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और नए या हरे रंग के कपड़े पहनती हैं। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, मिठाई और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ फलाहार करके भी व्रत करती हैं। शाम को कथा सुनने और आरती करने के बाद व्रत का समापन किया जाता है।
हरियाली तीज पर हरे रंग का क्या महत्व है?
इस त्योहार में हरे रंग को बहुत शुभ माना जाता है। हरा रंग हरियाली, खुशहाली, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन हरी साड़ी, हरी चूड़ियां, मेहंदी और हरे रंग के आभूषण पहनना पसंद करती हैं। कई जगहों पर झूले भी लगाए जाते हैं और महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए इस पर्व का आनंद लेती हैं।
त्योहार से जुड़ी खास परंपराएं
हरियाली तीज के मौके पर कई घरों में बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। उन्हें कपड़े, मिठाई, श्रृंगार का सामान और उपहार दिए जाते हैं। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।











