रायसेन:हाईवे निर्माण के बीच प्राचीन हनुमान मंदिर पर संकट, दिगबाड़ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
रायसेन जिले की जनपद पंचायत बाड़ी के ग्राम दिगबाड़ में स्टेट हाईवे निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। हाईवे निर्माण के दौरान प्राचीन हनुमान मंदिर को हटाए जाने की आशंका के विरोध में गुरुवार से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मंदिर परिसर में एकत्र होकर मंदिर को यथावत रखने और सड़क का मार्ग बदलने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का केंद्र है।
हाईवे निर्माण के दौरान उठा विवाद
जानकारी के अनुसार बाड़ी से बुधनी-शाहगंज तक स्टेट हाईवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए कई मकानों और पेड़ों को पहले ही हटाया जा चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रारंभिक नक्शे में सड़क मंदिर के आगे और पीछे से निकलनी थी, लेकिन अब संबंधित अधिकारी मंदिर को सड़क के बीच में बताते हुए उसे हटाने की बात कर रहे हैं।
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मंदिर से जुड़ी है वर्षों पुरानी आस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हनुमान मंदिर कई वर्षों पुराना है और इसकी धार्मिक मान्यता दूर-दूर तक है। श्रद्धालुओं के अनुसार यहां मोनी बाबा ने वर्षों तक तपस्या की थी और उनकी अखंड धूनी आज भी निरंतर जल रही है। हर मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में वर्षों से रामायण का अखंड पाठ और रामधुन का आयोजन भी नियमित रूप से होता आ रहा है।
हम विकास के विरोध में नहीं हैं
धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों और धार्मिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध सड़क निर्माण से नहीं है। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों का समर्थन करते हैं लेकिन मंदिर को हटाकर सड़क बनाने के पक्ष में नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क के अलाइनमेंट में थोड़ा बदलाव कर दिया जाए तो मंदिर को सुरक्षित रखते हुए भी हाईवे का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से इसी विकल्प पर विचार करने की मांग की है।
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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना दे रहे ग्रामीणों और धार्मिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक भी पहुंचाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना है ताकि विकास कार्य और आस्था दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
Edited By: Sumit Shrivastava














