कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता सहित राज्य के कई जिलों में शुक्रवार दोपहर अचानक धरती कांप उठी। दोपहर करीब 1:30 बजे आए भूकंप ने कुछ सेकंड के लिए लोगों की धड़कनें बढ़ा दीं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.3 मापी गई।
जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र बांग्लादेश की राजधानी ढाका के अगरगांव इलाके में था, जो पश्चिम बंगाल की सीमा से करीब 26 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। झटके इतने तेज थे कि कोलकाता में बहुमंजिला इमारतें कुछ सेकेंड तक हिलती रहीं और लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
भूकंप का असर सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। हावड़ा, हुगली, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में भी लोगों ने कंपन महसूस किया। कई जगहों पर दफ्तरों में बैठे कर्मचारियों ने अचानक फर्नीचर और सीलिंग फैन हिलते देखे।
कुछ पुराने मकानों में दीवारों के झुकने और प्लास्टर गिरने की भी खबर सामने आई है, हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अचानक आए झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। कोलकाता की रहने वाली एक युवती ने बताया कि, वे अपने घर में सोफे पर बैठी थीं, तभी अचानक झटके महसूस हुए। सोफा और पंखा हिलने लगे, टेबल पर रखी बोतल नीचे गिर गई। वे और उनके परिवार के सदस्य तुरंत घर से बाहर भागे और नीचे खुले स्थान पर खड़े हो गए।
कई ऑफिस परिसरों में भी कर्मचारियों ने एहतियात के तौर पर इमारतें खाली कर दीं। कुछ मिनटों तक सड़कों और गलियों में लोगों की भीड़ देखी गई।
कोलकाता में फरवरी महीने के दौरान यह दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले 3 फरवरी की रात भी शहर में कंपन महसूस हुआ था। तब भूकंप का केंद्र म्यांमार में था और उसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6 दर्ज की गई थी।
लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि, पूर्वी भारत और बांग्लादेश का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है, इसलिए यहां समय-समय पर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
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इससे पहले नवंबर 2025 में बांग्लादेश के ढाका और चिटगांव समेत कई इलाकों में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था। उस समय इसके झटके पश्चिम बंगाल के कोलकाता और सिलीगुड़ी तक महसूस किए गए थे। उस भूकंप में बांग्लादेश में 6 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
बताया गया था कि, नरसिंगडी के माधबडी इलाके में स्थित एक 10 मंजिला इमारत झुक गई थी। यहां तक कि बांग्लादेश-आयरलैंड के बीच चल रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था।
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। इस पैमाने का हर अगला स्तर पिछले स्तर से 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।
अलग-अलग तीव्रता का असर:
इस लिहाज से 5.3 तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का माना जाता है, जो संरचनात्मक रूप से कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
पूर्वी भारत और बांग्लादेश का इलाका टेक्टोनिक प्लेट्स के जंक्शन के पास स्थित है। हिमालयी क्षेत्र की सक्रियता और बंगाल बेसिन की संरचना के कारण यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। हालांकि, अधिकतर झटके मध्यम तीव्रता के होते हैं, लेकिन घनी आबादी और पुरानी इमारतों के कारण जोखिम बना रहता है।
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लगातार आ रहे भूकंप के झटकों से कोलकाता और आसपास के जिलों में चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन राहत की बात यह है कि इस बार किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी इलाकों में मजबूत निर्माण और आपदा प्रबंधन की तैयारियां बेहद जरूरी हैं।