High Court News : हाईकोर्ट ने पूछा-क्या रेत ठेकेदार ने सड़क बनाकर रोकी है केवई नदी की जलधारा?

जबलपुर। अनूपपुर जिले की केवई नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन और प्राकृतिक जलधारा को रोके जाने के आरोपों को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने काफी गंभीरता से लिया है। जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जेके पिल्लई की वेकेशन बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या वाकई रेत ठेकेदार ने नदी पर सड़क बनाकर जलधारा को रोकने का प्रयास किया है? जवाब के लिए 15 दिनों का समय देकर बेंच ने अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद करने के निर्देश दिए हैं।
आरोप-नदी के बीचोबीच बनाई अस्थाई सड़क
अनूपपुर के ग्राम बिजुरी के पत्रकार प्रकाश सिंह परिहार की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि वहां की 18 रेत खदानों (कुल क्षेत्रफल 89.421 हेक्टेयर) से रेत निकालने के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इस प्रक्रिया में पिपरिया (नर्मदापुरम) के खदान संचालक मे. एसोसिएट कॉमर्स ने सालाना करीब 17.75 करोड़ रुपए की अधिकतम बोली लगाकर ठेका हासिल किया था। निविदा के बाद खनिज विभाग द्वारा खदान संचालक मे. एसोसिएट कॉमर्स के पक्ष में 'लेटर ऑफ इंटेंट' जारी किया गया, जिसके बाद अनूपपुर के कोतमा तहसील अंतर्गत ग्राम गोहन्द्रा के आराजी नंबर 843, 846 और 847 (कुल रकबा 0.902 हेक्टेयर) पर रेत उत्खनन का कार्य शुरू किया गया। आरोप है कि ठेकेदार ने केवई नदी की मुख्य जलधारा के बीचों-बीच एक अस्थाई सड़क बना दी, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
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पर्यावरण को भारी नुकसान
इस लापरवाही के कारण क्षेत्र के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस बारे में संबंधितों को शिकायतें देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दाखिल की गई। मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मेन्द्र प्रसाद पाठक और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जाह्नवी पंडित ने पक्ष रखा।
दो बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
- क्या रेत ठेकेदार द्वारा किए जा रहे खनन कार्य के कारण नदी के पानी का प्राकृतिक प्रवाह रोका गया है?
- क्या रेत के भंडारण के संबंध में निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है?
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