Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

केरल चुनाव 2026 ;CPI (M) इस बार किन मुद्दों पर उतरेगी, भाजपा का दबदबा भी बनी टेंशन

पिनरई विजयन और शीर्ष नेतृत्व अब बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं। उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर की रणनीति तक, हर कदम संतुलन के साथ रखा जा रहा है। आंतरिक चुनावी प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो चुका है।
CPI (M) इस बार किन मुद्दों पर उतरेगी, भाजपा का दबदबा भी बनी टेंशन
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    तिरुवनंतपुरम। केरल की सियासत में एक बार चुनावी बिगुल के लिए तैयार है। विधानसभा चुनाव को लेकर जमीन पर तैयारी अब रणनीतिक मोड में प्रवेश कर चुकी है। सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (Marxist) ने अपने चुनावी रोडमैप पर काम शुरू कर दिया है। दूसरी ओर भाजपा और अन्य दलों ने भी इस इलेक्शन के लिए जमीनी  स्तर पर प्लानिंग तैयार कर ली है।

    सचिवोंं की अहम बैठक

    शनिवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्किस्ट) के 17 सदस्यीय स्टेट सेक्रेटेरिएट की अहम बैठक हुई, जहां संभावित उम्मीदवारों की पहली सूची पर गंभीर मंथन हुआ। संकेत हैं कि जल्द ही शुरुआती नामों पर मुहर लग सकती है। पार्टी का फोकस साफ है लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी। हालांकि, समीकरण पूरी तरह आसान नहीं हैं। हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी को झटका लगा था। कई पारंपरिक गढ़ दरक गए और छह में से सिर्फ एक निगम पर ही नियंत्रण बच पाया। यह परिणाम नेतृत्व के लिए अलर्ट सिग्नल की तरह देखा जा रहा है।

    यह भी पढ़ें: शराब नीति घोटाला केस : अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बरी, कोर्ट में CBI को बड़ा झटका

    शीर्ष नेतृत्व फूंक-फूंक कर रख रहा कदम

    पिनरई विजयन और शीर्ष नेतृत्व अब बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं। उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर की रणनीति तक, हर कदम संतुलन के साथ रखा जा रहा है। आंतरिक चुनावी प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो चुका है। अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी अपनी संगठनात्मक ताकत को फिर से कैसे रीसेट करती है और क्या वह एंटी-इंकम्बेंसी की आशंकाओं को मैनेज कर पाती है।

    क्या है विजयन के पार्टी की रणनीति

    विजयन की अगुवाई वाली सरकार अपनी उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा सामने रख रही है जिनमें कल्याणकारी योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और संकट के दौर में प्रशासनिक प्रबंधन को मुख्य उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है। नैरेटिव साफ है स्थिरता, डिलीवरी और सिस्टम पर पकड़। ऐसे में चुनाव आसान नहीं होने वाले हैं।
    दूसरी ओर विपक्ष जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को चुनावी बहस का केंद्र बना रहा है। उनका तर्क है कि विकास के दावों के साथ-साथ निर्णय प्रक्रिया और संसाधनों के उपयोग पर भी स्पष्टता जरूरी है।

    यह भी पढ़ें: Chip Revolution : भारत में पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कल से होगा शुरू, PM Modi देंगे सौगात

    शहरी सीटों पर भाजपा का बढ़ता वर्चस्व

    मैदान की वास्तविक तस्वीर और दिलचस्प है। अल्पसंख्यक वोट बैंक में हलचल, शहरी सीटों पर भाजपा की बढ़ती सक्रियता और कुछ चुनिंदा सीटों पर हल्के लेकिन असरदार मूड शिफ्ट ये सब संकेत दे रहे हैं कि इस बार कोई बड़ी लहर नहीं, बल्कि सीट-दर-सीट मनोवैज्ञानिक मुकाबला निर्णायक होगा।

    लोकल बॉडी इलेक्शन में लेफ्ट बुरी तरह बिखरी थी

    सीपीआई (M) के लिए इस बार की चुनावी राह सीधी रेखा नहीं, बल्कि कड़ी परीक्षा जैसी दिख रही है। दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों ने संगठन को बड़ा झटका दिया। 2020 में जहां पार्टी के नियंत्रण में पांच नगर निगम थे, वहीं अब यह संख्या सिमटकर सिर्फ एक पर आ गई है।
    यही गिरावट शीर्ष नेतृत्व को अलर्ट मोड में ले आई है। 

    जमीन पर कैडर एक्टिवेशन से लेकर उम्मीदवार चयन तक, हर कदम अब अतिरिक्त सावधानी के साथ उठाया जा रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 140 में से 75 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और 62 सीटें जीतकर मजबूत वापसी की थी। वह प्रदर्शन संगठनात्मक अनुशासन और बूथ-स्तरीय पकड़ का उदाहरण माना गया था।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

    Latest Posts