‘वंदे मातरम्’ विवाद में कांग्रेस पार्षद को झटका:अग्रिम जमानत याचिका खारिज

इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा गायन से इनकार करने का मामला अब कानूनी रूप से और गंभीर हो गया है। राष्ट्रगीत के कथित अपमान को लेकर दर्ज प्रदेश के पहले प्रकरण में नया मोड़ तब आया, जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख की अग्रिम जमानत याचिका जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी। इस फैसले के बाद मामले में पुलिस कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
अभिजीत सिंह राठौर, शासकीय अधिवक्ता
बजट सत्र में शुरू हुआ था विवाद
8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख देर से पहुंचीं और अपने प्रश्न पर चर्चा कराने का अनुरोध किया। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि वे राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के दौरान सदन में उपस्थित नहीं थीं। विवाद तब बढ़ गया जब फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान ने कथित तौर पर धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया। भाजपा पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन में जमकर हंगामा हुआ।
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सभापति ने सदन से बाहर जाने को कहा
विवाद बढ़ने पर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। बाद में पार्षद रुबीना इकबाल खान द्वारा भी इस रुख का समर्थन किए जाने से मामला और अधिक राजनीतिक हो गया।
भाजपा की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
घटना के बाद भाजपा पार्षदों की शिकायत पर एमजी रोड थाना पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने दोनों पार्षदों को थाने बुलाकर पूछताछ भी की थी।
अदालत से नहीं मिली राहत
मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए फौजिया शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश रूपेश नाइक ने याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद अब पुलिस की आगामी कार्रवाई और मामले की कानूनी दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। वहीं कांग्रेस नेतृत्व ने इसे संबंधित पार्षदों का व्यक्तिगत निर्णय बताया था। कांग्रेस की ओर से मामले की जांच के लिए गठित समिति अब तक कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं कर सकी है।












