अपने अधिकार जानिए: हाईकोर्ट को चिट्ठी भेजकर भी नागरिक पा सकते हैं इंसाफ, जानें कैसे

योगेश सोनी, जबलपुर। आमतौर पर लोगों की राय होती है कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद ही उन्हें इंसाफ मिलेगा, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है। न्याय पाने के लिए जरूरी नहीं है कि याचिका दायर करके ही इंसाफ की गुहार लगाई जाए। सच्चाई यह है कि भारतीय न्याय व्यवस्था इतनी मानवीय और संवेदनशील है कि एक साधारण चिट्ठी के जरिए भी आप पीड़ा को बता सकते हैं।
क्या है चिट्ठी से न्याय की व्यवस्था
भारतीय संविधान की भावना को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने यह व्यवस्था बनाई है कि यदि कोई नागरिक, विशेषकर गरीब, कमजोर या ग्रामीण क्षेत्र का व्यक्ति कोई पत्र/पोस्टकार्ड लिखकर अपनी समस्या अदालत को भेजता है और यदि उसमें किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का मामला प्रतीत होता है, तो अदालत स्वयं उसे याचिका में बदल सकती है। ऐसे पत्र को लेटर पिटीशन का दर्जा दिया जाता है।
किन मामलों में आप भेज सकते हैं चिट्ठी
कोई भी व्यक्ति जमीन से जबरन बेदखली, पुलिस की बर्बरता या अवैध हिरासत, किसी गरीब की मजदूरी या पेंशन न मिलना, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना, दलित, आदिवासी, महिला या बच्चे के साथ अन्याय और पर्यावरणीय क्षति या सार्वजनिक संसाधनों की लूट के मामलों में न्यायालय को चिट्ठी भेज सकता है।
कैसी हो चिट्ठी की इबारत
यदि किसी व्यक्ति को चिट्ठी के जरिए इंसाफ चाहिए तो उसमें स्पष्ट और सीधे शब्दों में अपनी बात लिखना जरूरी है। चिट्ठी में घटना की तारीख, स्थान, जिम्मेदार व्यक्ति/संस्था आदि का जिक्र करें। साथ ही चिट्ठी में नाम और पता स्पष्ट होना चाहिए। गुमनाम पत्र पर कोर्ट संज्ञान नहीं लेती है। हमेशा याद रखें, अधिकार की जानकारी ही असली ताकत है।





















