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‘खेत बचाओ अभियान’ आज से होगा शुरू!वैज्ञानिक पहुंचेंगे गांव-गांव, किसानों से सीधा संवाद करेंगे शिवराज चौहान

देशभर में कृषि सुधार और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए 1 जून से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होगी। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण और नकली खाद बीज की पहचान के बारे में जागरूक करना है। यह अभियान खेती को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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वैज्ञानिक पहुंचेंगे गांव-गांव, किसानों से सीधा संवाद करेंगे शिवराज चौहान
फाइल फोटो

मध्य प्रदेश। देश में किसानों की खेती को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जून से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से की जा रही है। इस अभियान का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तरीकों से जोड़ना है ताकि मिट्टी की गुणवत्ता सुधरे, जल का सही उपयोग हो और नकली खाद-बीज से किसानों को नुकसान न हो। यह अभियान गांव गांव तक जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहेगा।

रायसेन से होगी राष्ट्रीय स्तर पर अभियान की शुरुआत

‘खेत बचाओ अभियान’ की औपचारिक शुरुआत मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से हो रही है। रामसिया गांव को इसके लिए विशेष रूप से चुना गया है। सरकार का मानना है कि गांवों से ही खेती की असली तस्वीर बदल सकती है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे और किसानों से सीधे संवाद भी करेंगे। इस मौके पर देशभर के कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। अभियान को एक जन आंदोलन की तरह आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है ताकि अधिक से अधिक किसान इससे जुड़ सकें।

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खेती की नई तकनीक की जानकारी

इस अभियान के दौरान किसानों को खेती की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। मिट्टी परीक्षण, सॉइल हेल्थ कार्ड, फसल चयन और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि बदलते मौसम और कम बारिश की स्थिति में कौन सी फसलें अधिक लाभदायक हो सकती हैं। इसके अलावा प्राकृतिक खेती और रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकें और उनकी आय में सुधार हो।

नकली खाद और बीज से बचाव पर विशेष फोकस

खेती में होने वाले बड़े नुकसान का एक कारण नकली खाद, बीज और कीटनाशक भी हैं। इसी समस्या को देखते हुए इस अभियान में नकली कृषि सामग्री की पहचान करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। किसानों को बताया जाएगा कि असली और नकली उत्पाद में फर्क कैसे किया जा सकता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा और उनकी फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। विशेषज्ञ खेतों में जाकर डेमो के माध्यम से किसानों को वास्तविक उदाहरण भी दिखाएंगे ताकि वे आसानी से समझ सकें।

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जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

इस अभियान में जल संरक्षण को भी एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया है। किसानों को बताया जाएगा कि पानी का सही उपयोग कैसे किया जाए और कम पानी में भी बेहतर उत्पादन कैसे लिया जा सकता है। साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। हरी खाद, जैविक खेती और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहे।

सरकारी योजनाओं से किसानों को जोड़ा जाएगा

इस अभियान के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा बीज किट, कृषि उपकरण और दलहन-तिलहन मिशन से भी किसानों को लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि किसान सिर्फ जानकारी ही न लें बल्कि योजनाओं का सीधा लाभ भी प्राप्त करें, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

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गांव गांव तक पहुंचेगा अभियान

सरकार ने इस अभियान को पूरे देश में एक महीने तक चलाने की योजना बनाई है। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और वैज्ञानिक टीम गांव गांव जाकर किसानों से सीधे संवाद करेंगे। हर जिले का अलग अलग कार्यक्रम तय किया गया है ताकि किसी भी क्षेत्र के किसान इससे वंचित न रहें। निगरानी के लिए एक डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया जाएगा जिससे पूरे अभियान की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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