जगन्नाथ रथ यात्रा में 2 की मौत...सरकार ने भगदड़ को नकारा, 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए थे

पुरी। ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्री की शुरुआत हुई, तेज बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर दिखा, हालांकि विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा में भगदड़ जैसी स्थिति भी बनी जिसके कारण दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ओडिशा सरकार ने इस पर अपना बयान जारी किया है। सीएम मोहन चरण माझी का कहना दोनों भक्तों की मौत भगदड़ के कारण नहीं हुई बल्कि उन्हें पहले से बिमारी की वजह से उनकी जान गई।
CMO ने जारी किया बयान
2 श्रद्धालुओं की मौत को भगदड़ से जोड़कर बताने पर सीएमओ का कहना है कि रथयात्रा के दौरान करीब 7 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, इनमें 60 साल के एक श्रद्धालु की मौत हुई हालांकि मौत किन कारणों से हुई इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है जबकि एक अन्य की मौत हार्ट अटैक से हुई जिसकी आयु 35 साल बताई गई।
10 लाख श्रद्धालु उमड़े, करीब 1400 मीटर लंबा रथ खींचा
राज्य सरकार के अनुसार जगन्नाथ यात्रा में हर साल देश के कई शहरों से भक्त इसमें शामिल होते हैं। इस बार करीबन 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने इसमें हिस्सा लिया, गुरुवार देर शाम तक महाप्रभु जगन्नाथ का 200 मीटर रथ, भगवान बलभद्र का 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ 700 मीटर बढ़ाकर रूका अब रथ यात्रा आज सुबह भगवा न जगन्नाथ की आरती के साथ यात्रा की दोबारा शुरुआत हुई
मेघराज ने भगवान जगन्नाथ पर की बौछार
ओडिशा में गुरुवार सुबह से ही कई इलाकों में तेज बारिश हो रही है। कई अनुष्ठान को पानी के बीच में बनाना पड़ा। शाम 5 बजे रथ को आगे बढ़ाया गया, हॉस्टल और लॉज में रूके में श्रद्धालुओं की भीड़ आना शुरू हुई, कुछ ही मिनटों में अधिक लोगों के इकट्ठा होने के कारण लोग आपस में धक्का-मुक्की करने लगे। इतना ही नहीं मौसम विभाग ने रथ यात्रा के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। जिसको देखते हुए तैयारियों में कई कसर नहीं छोड़ी गई, पुलिस को अनुमान था कि अधिक बारिश के कारण श्रद्धालुओं की तादाद में कमी आ सकती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं दिखा बारिश बंद होते ही अचनानक जनसैलाब बढ़ गया और भीड़ बेकाबू हो गई, जिसके कारण कई भक्त इधर- उधर निकलने के चक्कर में एक- दूसरे पर गिर पड़े।
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गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं भगवान जगन्नाथ?
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। हर साल रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने मुख्य मंदिर से निकलकर यहां पहुंचते हैं।
- तीनों देवता 7 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं। इसके बाद बहुड़ा यात्रा के जरिए वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
- साल में सिर्फ 7 दिन ही खुलती है रौनक मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। उनकी पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर इस मंदिर का नाम गुंडिचा मंदिर पड़ा।
- सालभर यह मंदिर लगभग खाली रहता है और सिर्फ रथयात्रा के दौरान ही भगवान यहां विराजते हैं।
- इसी दौरान लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं।
रथयात्रा में भगदड़ जैसे हालात क्यों बने?
रथयात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन में कई कमियां सामने आईं, जिससे कुछ समय के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। मंदिर के सिंहद्वार से रथों की ओर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही, लेकिन समय रहते प्रवेश को नियंत्रित नहीं किया गया। भीड़ बढ़ने के बावजूद लोगों को दूसरे रास्तों पर मोड़ने की व्यवस्था नहीं की गई। आने और जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग मार्ग स्पष्ट नहीं होने से क्रॉस मूवमेंट बढ़ गया, जिससे दबाव और बढ़ा। इसके अलावा कई जगह लगी बैरिकेडिंग भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय चोक पॉइंट बन गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि, ओडिशा सरकार का कहना है कि दो श्रद्धालुओं की मौत भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में कमी की वजह से नहीं हुई।
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बहुड़ा यात्रा में मौसी मां मंदिर रुकते हैं भगवान जगन्नाथ
रथयात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर में सात दिन प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा बहुड़ा यात्रा के जरिए श्रीमंदिर लौटते हैं। वापसी के रास्ते में भगवान मौसी मां मंदिर में कुछ समय के लिए विराजते हैं। यहां उन्हें ओडिशा का पारंपरिक व्यंजन 'पोडा पीठा' भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मौसी अपने भांजे भगवान जगन्नाथ का इसी विशेष पकवान से स्वागत करती हैं। यह रस्म रथयात्रा की सबसे महत्वपूर्ण और अनोखी परंपराओं में से एक मानी जाती है।











