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सड़क किनारे बितानी पड़ी रात! शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले, जिसके यहां रुकना था, उसे प्रशासन ने धमकाया, इसलिए जमीन पर सोए

गो-रक्षा और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर यात्रा कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कन्नौज दौरा चर्चा में आ गया। रात्रि विश्राम की व्यवस्था अचानक बदलने के बाद उन्हें सड़क किनारे अस्थायी शिविर में रात गुजारनी पड़ी। इस मामले में प्रशासन और शंकराचार्य पक्ष के दावे अलग-अलग सामने आए हैं।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले, जिसके यहां रुकना था, उसे प्रशासन ने धमकाया, इसलिए जमीन पर सोए
फाइल फोटो

कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में गो-संरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश भर की यात्रा कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को निर्धारित स्थान पर ठहरने की व्यवस्था नहीं मिल सकी, जिसके बाद उन्होंने सड़क किनारे बने अस्थायी शिविर में रात्रि विश्राम किया। उनके समर्थकों ने इसे प्रशासनिक हस्तक्षेप बताया, जबकि अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।

यात्रा के दौरान कन्नौज पहुंचे शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों गो-संरक्षण और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी यात्रा पर निकले हुए हैं। इसी क्रम में बुधवार शाम वह औरैया के रास्ते कन्नौज पहुंचे। शहर में उनके स्वागत के लिए पहले से तैयारियां की गई थीं और कई अनुयायी उनका इंतजार कर रहे थे। कुछ समय तक वह स्वागत कार्यक्रम में शामिल रहे और फिर आगे बढ़ने की तैयारी की गई।

रात्रि विश्राम की व्यवस्था अचानक बदली

यात्रा के दौरान शंकराचार्य का रात्रि विश्राम छिबरामऊ क्षेत्र के एक निजी स्कूल में प्रस्तावित था लेकिन शाम के समय आयोजकों को प्रशासन की ओर से कार्यक्रम से संबंधित अनुमति पत्र दिखाने के लिए कहा गया। आयोजकों के पास ऐसी कोई अनुमति नहीं थी। इसके बाद स्कूल में रुकने की योजना को स्थगित कर दिया गया और शंकराचार्य को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ी।

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सड़क किनारे बने शिविर में बिताई रात

ठहरने की व्यवस्था नहीं होने के बाद शंकराचार्य ने कन्नौज के एक चौराहे के पास खाली सरकारी जमीन पर रुकने का फैसला किया। वहां अस्थायी टेंट लगाया गया, जहां उन्होंने अपने शिष्यों के साथ समय बिताया। रात के समय गर्मी और बिजली की कमी के कारण शुरुआती दिक्कतें भी सामने आईं। बाद में टेंट में कूलर और रोशनी की व्यवस्था की गई। सुरक्षा के लिए पुलिस बल पूरी रात वहां मौजूद रहा।

प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोप

शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनकी यात्रा को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि जिस स्थान पर उन्हें ठहरना था, वहां के प्रबंधन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल संचालक को कार्यक्रम रद्द करने के लिए मजबूर किया गया। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसी भी परिस्थिति में उनकी यात्रा नहीं रुकेगी और वह अपने अभियान को पूरा करके रहेंगे।

गाय को राष्ट्रमाता बनाने की मांग पर जोर

शंकराचार्य ने अपनी यात्रा के उद्देश्य को दोहराते हुए कहा कि वह गाय के संरक्षण और सम्मान के लिए जनजागरण कर रहे हैं। उनके अनुसार, समाज में गाय के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब तक उनकी यात्रा लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर चुकी है और आने वाले दिनों में यह अभियान प्रदेश के बाकी हिस्सों तक भी पहुंचेगा।

स्कूल प्रबंधन ने क्या कहा?

जिस स्कूल में रात्रि विश्राम प्रस्तावित था, उसके प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखा। स्कूल संचालकों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से कार्यक्रम से जुड़ी अनुमति के बारे में पूछा गया था। चूंकि उनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, इसलिए उन्होंने कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने इस स्थिति पर खेद जताते हुए कहा कि वे शंकराचार्य का स्वागत करना चाहते थे लेकिन परिस्थितियों के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया।

प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार

कन्नौज प्रशासन ने शंकराचार्य के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संत या धर्मगुरु को रोकने का सवाल ही नहीं उठता। प्रशासन के अनुसार, उनकी सुरक्षा और यात्रा को सुचारू रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों ने कहा कि नियमों के तहत आवश्यक जानकारी मांगी गई थी और पूरे मामले को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दिया जा रहा है।

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यात्रा जारी रखने का किया ऐलान

शंकराचार्य अपने काफिले के साथ फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गाय और गौ-संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर वह लगातार लोगों के बीच जाएंगे और अपनी बात पहुंचाते रहेंगे। 

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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