गुरु पूर्णिमा :पवित्र रज माथे से लगाकर भावुक हुए भक्त, बुधवार को कुबेरेश्वरधाम में होगा गुरु दीक्षा महोत्सव का भव्य आयोजन

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में बुधवार को गुरु दीक्षा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा के समापन के बाद अब धाम में गुरु भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का महासंगम देखने को मिलेगा। देशभर के कोने-कोने से श्रद्धालु गुरु दीक्षा प्राप्त करने के लिए कुबेरेश्वरधाम पहुंच चुके हैं। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा क्षेत्र शिव भक्ति और गुरु आस्था के रंग में रंग गया है।
श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंज उठा कुबेरेश्वरधाम
गुरु दीक्षा महोत्सव के एक दिन पहले ही कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। धाम की ओर जाने वाले मार्गों, हाईवे और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की लंबी कतारें नजर आईं। भारी भीड़ के कारण यातायात धीमी गति से चलता रहा, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। देशभर से आए भक्त अपने परिवार के साथ कुबेरेश्वरधाम पहुंचे और भगवान शिव तथा गुरु के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते रहे। समिति और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहा।
कथा समापन पर भावुक हुए श्रद्धालु, पवित्र रज को माथे से लगाया
पांच दिनों तक शिव महापुराण कथा के अमृत में डूबे श्रद्धालुओं के लिए कथा का अंतिम क्षण बेहद भावुक करने वाला रहा। जैसे ही कथा स्थल से समापन की घोषणा हुई, श्रद्धालुओं की आंखों में श्रद्धा और प्रेम के आंसू दिखाई देने लगे। कई भक्त कथा पंडाल की पवित्र मिट्टी को अपने हाथों में लेकर माथे से लगाते नजर आए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने इस रज को अपने लिए आशीर्वाद मानते हुए सुरक्षित रखा। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम से उनका रिश्ता अब जीवनभर बना रहेगा और वे फिर से यहां लौटकर आएंगे।
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पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया जीवन को सकारात्मक बनाने का संदेश
शिव महापुराण कथा के अंतिम दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को जीवन में ज्ञान और संस्कारों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल कथा सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथा में बताए गए मार्ग पर चलना ही वास्तविक साधना है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। भगवान पर विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ हर चुनौती का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक मोक्ष बाहरी संसार को छोड़ने में नहीं, बल्कि मन के अहंकार, मोह, लोभ और क्रोध को समाप्त करने में है।

गुरु-शिष्य का रिश्ता संस्कारों और विचारों का होता है आदान-प्रदान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु-शिष्य संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह रिश्ता धन या भौतिक वस्तुओं पर आधारित नहीं होता, बल्कि विचारों, संस्कारों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का संबंध होता है।
उन्होंने परिवार और माता-पिता की सेवा को भी जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में हर दिन माता-पिता के सम्मान और सेवा का दिन होता है। परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची भक्ति है।
कुबेरेश्वरधाम बना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
कथा के दौरान पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम आज देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। भगवान शिव की आराधना से यहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में यहां अनेक शिव महापुराण कथाओं का आयोजन हो चुका है और लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। कुबेरेश्वरधाम अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ सेवा और संस्कारों की भूमि के रूप में पहचान बना चुका है।
व्यासपीठ की मिट्टी लेने उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शिव महापुराण कथा के समापन के बाद व्यासपीठ के आसपास का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। कारपेट हटते ही श्रद्धालु उस पवित्र स्थान की मिट्टी लेने के लिए पहुंच गए, जहां पांच दिनों तक भगवान शिव की महिमा का वर्णन हुआ था। भक्त अपने हाथों से मिट्टी एकत्र करते नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने इस रज को घर ले जाकर पार्थिव शिवलिंग बनाने और पूजा करने की बात कही। महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों में आस्था के आंसू और चेहरे पर संतोष का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
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बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी श्रद्धालुओं की भीड़
कथा समापन के बाद कुबेरेश्वरधाम के आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बढ़ गई। देर रात तक श्रद्धालु अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए साधनों का इंतजार करते रहे। गुरु दीक्षा महोत्सव के कारण धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला लगातार जारी रहा। प्रशासन और समिति की टीमें व्यवस्थाओं में जुटी रहीं।
सुबह 9 बजे से शुरू होगा गुरु दर्शन और दीक्षा कार्यक्रम
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि बुधवार सुबह 9 बजे से गुरु दर्शन एवं गुरु दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ होगा। शाम 7 बजे तक श्रद्धालु गुरु दीक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि आयोजन को लेकर सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, भोजन प्रसादी सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया है।












