मंडला: कान्हा नेशनल पार्क में इलाज के दौरान बाघिन की मौत, एक महीने से कमजोर थी

मंडला। बाघिन के इलाज के लिए जबलपुर के डब्ल्यूएफएचए सहित देश के अन्य विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही थी। जांच के दौरान बाघिन में केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के लक्षण भी मिले थे। हालांकि बाघिन की मौत का अंतिम कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा, इसके लिए आवश्यक सैंपल लिए गए हैं।
करीब एक महीने से कमजोर चल रही थी बाघिन
कान्हा नेशनल पार्क की डिप्टी डायरेक्टर कोर प्रकाश वर्मा ने बताया कि बाघिन की हालत शुरू से ही गंभीर थी। करीब एक महीने से उसकी हालत कमजोर चल रही थी और वन विभाग की टीम लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रही थी। तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान बाघिन को बचाया नहीं जा सका।
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देश के विशेषज्ञों से ली गई इलाज की सलाह
बाघिन के इलाज के लिए डब्ल्यूएफएचए जबलपुर सहित देश के अन्य विशेषज्ञों से सलाह ली गई थी। विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही बाघिन का उपचार किया जा रहा था और वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। सामान्य उपचार के साथ उसकी कमजोर हालत को देखते हुए विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया गया था।
जांच में मिले केनाइन डिस्टेंपर के लक्षण
बाघिन की जांच के दौरान केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के लक्षण भी मिले थे। इसके बाद उपचार और निगरानी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह ली गई, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। हालांकि बाघिन की मौत का अंतिम कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा और इसके लिए आवश्यक सैंपल लिए गए हैं।
मौत के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई
बाघिन की मौत के बाद वन विभाग की टीम ने नियमानुसार पोस्टमार्टम की कार्रवाई की। इसके बाद अधिकारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में बाघिन का अंतिम संस्कार कराया गया। वन विभाग ने मौत के कारण की पुष्टि के लिए आवश्यक सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
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लगातार विशेषज्ञों की निगरानी में था उपचार
वन विभाग के अनुसार बाघिन की कमजोर हालत को देखते हुए उसके उपचार में जबलपुर के डब्ल्यूएफएचए के अलावा देश के अन्य वन्यजीव विशेषज्ञों से भी लगातार संपर्क किया गया। विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उपचार और निगरानी की जा रही थी, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बाघिन की हालत में सुधार नहीं हो सका और उसकी मौत हो गई।




















