सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मृत मिला चीतल, शव परीक्षण में आवारा कुत्तों के हमले की आशंका
सोहागपुर। फोरसिथ लॉज के स्टाफ की सूचना पर वन अमला मौके पर पहुंचा और डॉग स्क्वाड की सहायता से आसपास के क्षेत्र में सघन सर्चिंग की। 7 अक्टूबर को शासकीय पशु चिकित्सक डॉ. संजीव मालवीय ने चीतल का शव परीक्षण किया, जिसमें सभी अंग सुरक्षित मिले। वन विभाग ने आवश्यक सैंपल लेने के बाद नियमानुसार मृत चीतल का दाह संस्कार किया।
तेंदुए के शिकार की मिली थी सूचना
सूचना में तेंदुए द्वारा चीतल का शिकार किए जाने की आशंका जताई जा रही थी। सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी विलास डोंगरें ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना से अवगत कराया।
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डॉग स्क्वाड ने आसपास की सर्चिंग
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर वन अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और डॉग स्क्वाड की सहायता से घटनास्थल सहित आसपास के क्षेत्र में सघन सर्चिंग की गई। सर्चिंग के दौरान वन अमले को किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली। अंधेरा होने के कारण 6 अक्टूबर को मृत चीतल का शव परीक्षण नहीं हो सका, जिसके बाद शव को शासकीय वाहन से सुरक्षित स्थान पर ले जाकर वन विभाग के कर्मचारियों की निगरानी में रखा गया।
शव परीक्षण में कुत्तों द्वारा घायल करने की आशंका
7 अक्टूबर को शासकीय पशु चिकित्सक संजीव मालवीय द्वारा चीतल का शव परीक्षण किया गया। शव परीक्षण में प्रथमदृष्टया चीतल की मृत्यु का कारण आवारा कुत्तों द्वारा घायल किया जाना पाया गया। परीक्षण के दौरान चीतल के सभी अंग सुरक्षित मिले और वन विभाग द्वारा प्रयोगशाला परीक्षण के लिए आवश्यक सैंपल भी संकलित किए गए हैं।
वन अमले की मौजूदगी में दाह संस्कार
शव परीक्षण के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की उपसंचालक ऋषिभा सिंह नेताम, सहायक संचालक सोहागपुर शिव प्रसाद मैथानी, बागड़ा बफर वन परिक्षेत्र अधिकारी विलास डोंगरे और संबंधित वन अमले की मौजूदगी में मृत चीतल के सभी अंगों का नियमानुसार दाह संस्कार किया गया। वन विभाग ने प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया।
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कुछ ही दिनों में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं
गौरतलब है कि हाल ही में झिरिया-पचमढ़ी मार्ग पर करीब तीन माह के तेंदुए के शावक की भी वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वन विभाग द्वारा उसका भी नियमानुसार पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार किया गया था। लगातार सामने आ रही वन्यजीवों की मौत की घटनाओं ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।






















