दिल में भरकर ले जा रहा हूं जबलपुर की यादें:हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में भावुक हुए जस्टिस संजीव सचदेवा

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए जस्टिस संजीव सचदेवा के सम्मान में बुधवार रात हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर जस्टिस सचदेवा ने जबलपुर में बिताए अपने दो साल के कार्यकाल को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि यहां उन्हें अपार स्नेह और अपनापन मिला है।
यहां आकर लगा कि मैं अपने ही घर में हूं
उन्होंने कहा दो साल पहले जब मैं जबलपुर आया था, तब मन में सवाल था कि यह शहर कैसा होगा। लेकिन यहां पहुंचकर महसूस हुआ कि मैं अपने ही घर में हूं। अब यहां की सुनहरी यादें ट्रक में भरकर नहीं बल्कि अपने दिल में सहेज कर ले जा रहा हूं। जस्टिस सचदेवा के संबोधन के दौरान सभागार भावुक माहौल में डूब गया। उनके वक्तव्य पर उपस्थित अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।
बार एसोसिएशन ने किया सम्मान
समारोह में हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सचिव निखिल तिवारी सहित बार के पदाधिकारियों ने जस्टिस सचदेवा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन देकर सम्मान व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के सचिव निखिल तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के अध्यक्ष उमाकांत शर्मा ने किया।
एक ट्रक यादों के लिए भी बुक कर लीजिए
कार्यक्रम में मौजूद हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने जस्टिस सचदेवा के साथ अपने कार्यकाल की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि दोनों ने बेहद सौहार्दपूर्ण और मित्रवत वातावरण में काम किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा जस्टिस सचदेवा का सामान दिल्ली जाने के लिए पैक हो चुका है लेकिन मेरी गुजारिश है कि वे यहां की यादों के लिए भी एक अलग ट्रक बुक कर लें। उनकी इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद लोगों के बीच मुस्कान फैल गई।
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बोलने की आदत नहीं छोड़नी चाहिए: जस्टिस आनंद पाठक
हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस आनंद पाठक ने अपने संबोधन में आधुनिक दौर में संवाद की घटती संस्कृति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा पहले एक व्यक्ति दिनभर में औसतन साढ़े 16 हजार शब्द बोलता था लेकिन सोशल मीडिया के दौर में यह संख्या घटकर लगभग 12 हजार रह गई है। हमें बोलने और संवाद करने की आदत नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जस्टिस सचदेवा का जाना सभी के लिए भावुक क्षण है लेकिन इससे बड़ी खुशी इस बात की है कि उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में जिम्मेदारी मिली है।
दूसरी बार स्वागत करने का सौभाग्य मिला: विवेक तन्खा
राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि एक पखवाड़े के भीतर दूसरी बार किसी न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने पर उनका सम्मान करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस शील नागू के सम्मान कार्यक्रम में शामिल हुआ था और आज जस्टिस संजीव सचदेवा के सम्मान समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है।
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भावुक माहौल में दी गई विदाई
सम्मान समारोह के दौरान न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार सदस्यों ने जस्टिस संजीव सचदेवा के कार्यकाल की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम भावनात्मक माहौल के बीच संपन्न हुआ, जहां हर वक्ता ने जस्टिस सचदेवा के सरल व्यक्तित्व, कार्यशैली और न्यायिक योगदान को याद किया।












