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CG NEWS:नवा रायपुर जंगल सफारी में दिखा भारत का सबसे छोटा कठफोड़वा, दुर्लभ पक्षी ने बढ़ाई जैव विविधता की चमक

ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर पहली बार कैमरे में कैद, पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास मॉडल की बड़ी सफलता नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के बोटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों को उस समय बड़ी सफलता मिली जब बर्ड वॉक के दौरान ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर को देखा गया। इस दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें कैमरे में भी कैद हुई हैं, जिससे इसकी उपस्थिति का दस्तावेजी प्रमाण मिला है।
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नवा रायपुर जंगल सफारी में दिखा भारत का सबसे छोटा कठफोड़वा, दुर्लभ पक्षी ने बढ़ाई जैव विविधता की चमक

PREM KUMAR RAIPUR NEWS। नवा रायपुर की जंगल सफारी और बोटेनिकल गार्डन में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान भारत के सबसे छोटे और दुर्लभ कठफोड़वों में शामिल ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर दिखाई दिया है। तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में इस पक्षी की मौजूदगी को जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी ने बढ़ाई उत्सुकता

नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के बोटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों को उस समय बड़ी सफलता मिली जब बर्ड वॉक के दौरान ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर को देखा गया। इस दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें कैमरे में भी कैद हुई हैं, जिससे इसकी उपस्थिति का दस्तावेजी प्रमाण मिला है।

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शहरी क्षेत्र में दिखना बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी आमतौर पर घने और शांत जंगलों में पाया जाता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में किसी विकसित शहर के हरित क्षेत्र में इसका दिखाई देना इस बात का संकेत है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण पक्षियों और वन्यजीवों के लिए अनुकूल बना हुआ है।



फल-फूल रही नवा रायपुर की जैव विविधता

वन विभाग द्वारा विकसित जंगल सफारी और बोटेनिकल गार्डन आज विभिन्न पक्षियों, तितलियों और छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार किए जा रहे संरक्षण कार्यों का ही परिणाम है कि दुर्लभ प्रजातियां यहां अपना आशियाना बना रही हैं।

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क्या है ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर की खासियत?

यह कठफोड़वा आकार में बेहद छोटा होता है। इसकी लंबाई लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर तक होती है। सिर पर भूरे रंग का मुकुटनुमा भाग और काले-सफेद धब्बेदार पंख इसकी पहचान हैं। यह पेड़ों की छाल पर तेजी से चढ़ने-उतरने की क्षमता रखता है।

पेड़ों का डॉक्टर कहलाता है यह पक्षी

ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ों की छाल के अंदर छिपे कीटों और लार्वा को खाकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों को नियंत्रित करता है। इसी कारण इसे पेड़ों का प्राकृतिक डॉक्टर भी कहा जाता है।

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संरक्षण प्रयासों की मिली सफलता

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस पक्षी का रिकॉर्ड होना इस बात का प्रमाण है कि नवा रायपुर में विकसित हरित क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता को समृद्ध करती है बल्कि आम लोगों को भी प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देती है।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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