World Pancreatic Cancer Day :पीलिया बिना पेट दर्द हो तो सावधानी बरतें, हो सकता है पैंक्रियाज में कैंसर

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। अगर आप किसी ऐसे इलाके मे रहते हैं जहां वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है तो सांस की तकलीफ के साथ इसका असर पैंक्रियाज पर हो सकता है। लगातार ऐसे माहौल में रहने से पैंक्रियाज में कैंसर तक हो सकता है। एक दशक में इसके मामले दोगुना हो गए हैं। एम्स भोपाल की वीकली क्लीनिक में हर सप्ताह पैंक्रियाज कैंसर से जुड़ा एक मामला पहुंच रहा है। पहले माह में एक या दो मामले ही सामने आते थे। डॉक्टरों का कहना है कि पैंक्रियाज कैंसर सबसे घातक है, क्योंकि अक्सर इसके लक्षण तब सामने आते हैं, जब कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि अगर पीलिया हो, लेकिन पेट में दर्द न हो तो पैंक्रियाज कैंसर की जांच कराना चाहिए।
इसे न करें नजरअंदाज
- अचानक शुगर बढ़ना और शरीर का वजन कम होना
- बार-बार पीलिया होना और पेशाब और स्टूल का रंग बदलना
- भूख में कमी आने के साथ खाना खाने बाद मतली और उल्टी
इन स्थितियों में ज्यादा रिस्क
- बहुत ज्यादा शराब और सिगरेट का सेवन
- अक्सर फास्ट फूड और अल्ट्रा प्रॉसेस्ड फूड का सेवन
- ओबिसिटी बड़ा कारण है। खासतौर पर अगर कमर के आसपास एक्स्ट्रा फैट
- अचानक टाइप-2 डायबिटीज पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत हो सकता है।
- पेस्टिसाइड और पेट्रोकेमिकल्स के एक्सपोजर से भी रिस्क बढ़ता है।
डॉक्टर ने बताया कैसे रहें अलर्ट
पैंक्रियाटिक कैंसर का सबसे खतरनाक पक्ष ये है कि इसमें शुरूआती स्टेज में कोई लक्षण नजर नहीं आता है। इसके लक्षण आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब ट्यूमर पाचन तंत्र के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करना शुरू कर देता है। फिर भी कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिनसे हम इसका अनुमान लगा सकते हैं। -डॉ. अनिल शेजवार, जीएमसी, भोपाल
पैंक्रियाज का सबसे ज्यादा नुकसान पिज्जा, बर्गर जैसी हाई फैट अल्ट्रा प्रॉसेस्ड डाइट और शुगर ड्रिंक्स ने किया है। पैंक्रियाटिक कैंसर के मामले शहरों में ज्यादा हैं। शहर में फास्ट फूड और अल्ट्रा प्रॉसेस्ड फूड का ज्यादा इस्तेमाल संभावित वजहें हैं।
-डॉ. विशाल गुप्ता, एम्स भोपाल
कई शोध बताते हैं कि वायु प्रदूषण से पैंक्रियाज कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण (जैसे पीएम2.5) रक्तप्रवाह में प्रवेश कर पूरे शरीर में फैल सकते हैं,जो कैंसर के विकास में योगदान कर सकता है।
-डॉ. प्रणव रघुवंशी, वरिष्ठ गैस्ट्रोलॉजिस्ट












