प्रदेश के कई गोदामों में 3 साल से डंप है 9.37 लाख मीट्रिक टन मूंग

प्रदेश में तीन साल से सरकार को मूंग के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। साल 2022 में मूंग 208 करोड़ रुपए के नुकसान पर बेची गई।
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प्रदेश के कई गोदामों में 3 साल से डंप है 9.37 लाख मीट्रिक टन मूंग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। सरकार के लिए मूंग सिरदर्द बनती जा रही है। किसानों के साधने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने चुनाव से पहले मूंग खरीदी का निर्णय लिया था। इसे खुले बाजार में बेचने के लिए मार्कफेड कई बार टेंडर जारी कर चुका है, लेकिन खरीदने वाले व्यापारी आगे नहीं आ रहे हैं। अभी तक सिर्फ वर्ष 2022 में खरीदी गई मूंग पूरी तरह से बिक पाई है। इसमें भी सरकार को 208 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 की करीब दस लाख मीट्रिक टन मूंग अभी गोदामों में ही रखी हैं। 

    मूंग नहीं बिकने की ये है वजह 

    बाजार में मूंग के दाम कम होने से इसे लेने के लिए कारोबारी सामने नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा बाजार में मूंग की क्वालिटी ज्यादा बेहतर होती है। ताजी मूंग हर साल बाजार में आ जाती है। इसके चलते कारोबारी इसे लेने के लिए ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। बाजार और मार्कफेड के मूंग की दरों में 500 से 1000 रुपए तक का अंतर होता है।

    केंद्र और राज्य मिलकर करते हैं खरीदी 

    मूंग की खरीदी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करती हैं। खरीदी से पहले केंद्र सरकार कोटा तय करता है। इससे ज्यादा मूंग की खरीदी करने पर राज्य सरकार उसका भुगतान करती है। भोपाल संभाग, नर्मदापुरम, जबलपुर और उज्जैन संभाग के देवास जिले में सबसे ज्यादा खरीदी की जाती है।

    एक-एक दाना खरीदने के लिए संकल्पित

    राज्य सहकारी विणन संघ के एमडी आलोक सिंह कहते हैं कि सरकार किसानों का एक-एक दाना लेने के लिए संकल्पित है। इसमें नफा और नुकसान की बात नहीं है। उड़द और मूंग खुले बाजार में बेचने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार के द्वारा निर्धारित दर से कम दाम पर मूंग नहीं बेची जा सकती है।

    फैक्ट फाइल 

                    वर्ष         खरीदी 

    • वर्ष 2025  7.72 लाख मीट्रक टन 
    • वर्ष 2024  5.80 लाख मीट्रक टन
    • वर्ष 2023  5.60 लाख मीट्रक टन
    • वर्ष 2022  4.74 लाख मीट्रक टन

    अभी तक कितना स्टोरेज 

    • वर्ष 2025  7.72 लाख मीट्रिक टन
    • वर्ष 2024  1.60 लाख मीट्रिक टन
    • वर्ष 2023  5,500 मीट्रिक टन 

    आर्थिक नुकसान संभावित

    • वर्ष 2023  300 करोड़ रुपए 
    • वर्ष 2022  208 करोड़ रुपए 

    इस तरह सरकारी खरीदी

    • खरीदी वर्ष  प्रति क्विंटल राशि
    • वर्ष 2025      8,682 रुपए
    • वर्ष 2024      8,558 रुपए 
    • वर्ष 2023      7,755 रुपए 
    • वर्ष 2022      7,275 रुपए 
    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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