
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स (TRF) ने ली है। इस हमले में एक डॉक्टर और छह प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले का मास्टरमाइंड TRF चीफ शेख सज्जाद गुल था। जिसने अपने स्थानीय मॉड्यूल से यह हमला करवाया। यह पहली बार है जब कश्मीरियों और गैर-कश्मीरियों को एक साथ निशाना बनाया गया है।
आतंकियों ने रविवार (20 अक्टूबर) की रात गांदरबल के गगनगीर इलाके में श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे की टनल कंस्ट्रक्शन साइट पर हमला कर दिया। गोलीबारी में बड़गाम के डॉक्टर और पंजाब-बिहार के 6 मजदूरों की मौत हो गई।
1 महीने तक रेकी… फिर हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गगनगीर आतंकी हमले में TRF के 2-3 आतंकवादी शामिल हैं। टीआरएफ के लोकल मॉड्यूल ने इस घटना को अंजाम दिया है। इस हमले के लिए पिछले एक महीने से कंस्ट्रक्शन साइट की रेकी की जा रही थी। इसी वजह से हमले के तुरंत बाद आतंकी फरार होने में कामयाब हुए।
TRF प्रमुख शेख सज्जाद गुल है हमले का मास्टरमाइंड
जानकारी के अनुसार, इस हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा TRF प्रमुख शेख सज्जाद गुल है। उसके इशारे पर द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के लोकल मॉड्यूल को एक्टिव किया गया, जिसने कश्मीरियों और गैर-कश्मीरियों को एक साथ निशाना बनाकर हमला किया है। TRF के लिए प्रवासी लोगों को निशाना बनाना नई बात नहीं है। यह आतंकी संगठन कश्मीर में एक्टिव है।
TRF ने कश्मीरी पंडितों, सिख और गैर स्थानीय लोगों पर पिछले डेढ़ साल में कई हमले किए हैं। इसके हमले में कई कश्मीरी पंडित मारे गए हैं। पहले यह संगठन कश्मीर पंडितों की टारगेट किलिंग करता था। लेकिन अब गैर कश्मीरियों और सिखों को निशाना बना रहा है।
केंद्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट
इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और खुफिया ब्यूरो (IB) से रिपोर्ट मांगी है। सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं और नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी (NIA) भी घटनास्थल पर पहुंच गई है। वहीं हमले के बाद गांदरबल और गगनगीर के जंगलों में रात से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
खाना-खाने पहुंचे थे मजदूर और हो गया हमला
जानकारी के मुताबिक, रविवार (20 अक्टूबर) रात करीब 8.30 बजे टनल पर काम कर रहे सभी वर्कर खाना-खाने के लिये मेस में इकट्ठा हुए थे। उसी दौरान अचानक वहां पहुंचे 3 हथियारबंद आतंकियों ने वर्कर्स पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में दो गाड़ियां भी जलकर खाक हो गईं।
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में आतंकी हमले का सामना करने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने यह बताया। हमले में 7 लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक स्थानीय डॉक्टर भी शामिल है। अटैक में 5 टनल वर्कर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में इलाज चल रहा है।
सुरंग प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे सभी वर्कर्स
जिन वर्कर्स पर आतंकियों ने हमला किया, वे केंद्र सरकार की तरफ से चल रहे सुरंग प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। सभी सोनमर्ग की जेड मोड़ सुरंग पर काम कर रही टीम का हिस्सा थे। यह टनल मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले की गगनगीर घाटी को सोनमर्ग से जोड़ती है। इसका काम उत्तर प्रदेश की एप्को नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। टनल को 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
TRF के बारे में जानें
- द रेजिस्टेंस फ्रंट जम्मू-कश्मीर में एक्टिव है और लश्कर-ए-तैयबा की एक तरह से ब्रांच है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के बाद एक ऑनलाइन यूनिट के रूप में टीआरएफ शुरू हुआ था।
- टीआरएफ को बनाने का मकसद लश्कर जैसे आतंकी संगठनों को कवर देना है। इसके बैकडोर से पाकिस्तानी सेना और ISI खुलकर सहयोग करती है। टीआरएफ ज्यादातर लश्कर के फंडिंग चैनलों का इस्तेमाल करता है।
- लश्कर से जुड़े साजिद जट, सज्जाद गुल और सलीम रहमानी इसको लीड कर रहे हैं।
- टीआरएफ को बनाने में लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी हाथ रहा है।
- यह संगठन इसलिए बनाया गया ताकि भारत में होने वाले आतंकी हमलों में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम न आए और वो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैक लिस्ट में आने से बच जाए।
- टीआरएफ के आतंकी टारगेट किलिंग पर फोकस करते हैं। वो ज्यादातर गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाते हैं, ताकि बाहरी राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर आने से बचें।
- टीआरएफ का नाम तब चर्चा में आया जब उसने 2020 में बीजेपी कार्यकर्ता फिदा हुसैन, उमर राशिद बेग और उमर हाजम की कुलगाम में बेरहमी से हत्या कर दी थी।
- गृह मंत्रालय ने मार्च में राज्यसभा को बताया था कि “द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा संगठन है और 2019 में अस्तित्व में आया।”
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