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जगदीप धनखड़ का इस्तीफा : सेहत या सियासत? अचानक फैसले से देश की राजनीति में हलचल, राजनाथ के ऑफिस में थी अलग हलचल

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जगदीप धनखड़ का इस्तीफा : सेहत या सियासत? अचानक फैसले से देश की राजनीति में हलचल, राजनाथ के ऑफिस में थी अलग हलचल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन उनकी टाइमिंग और हालिया गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला केवल स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं दिख रहा। मानसून सत्र के पहले दिन वह पूरे दिन सक्रिय रहे, विपक्षी नेताओं से मिले, सदन का संचालन किया और महाभियोग प्रस्ताव पर औपचारिक घोषणा भी की। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उनके इस्तीफे के पीछे कुछ और कारण हैं?

    क्या स्वास्थ्य ही कारण था?

    जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन उन्होंने उसी दिन राज्यसभा में कार्यवाही चलाई, विपक्षी नेताओं से शाम 5:30 बजे मुलाकात की, रात 7:30 बजे फोन पर बातचीत भी की और उनका 23 जुलाई को जयपुर दौरा भी प्रस्तावित था। इन गतिविधियों में कहीं भी उनके अस्वस्थ होने का कोई संकेत नहीं था।

    सियासी तूफान से ठीक पहले इस्तीफा

    • इस्तीफे से कुछ ही घंटे पहले राज्यसभा में एक महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
    • दोपहर 2 बजे, न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ विपक्ष ने प्रस्ताव दिया।
    • धनखड़ ने इसे स्वीकार करते हुए शाम 4:07 बजे सदन में इसकी जानकारी दी।
    • उन्होंने महाभियोग की प्रक्रिया का उल्लेख किया, कानून मंत्री से पुष्टि मांगी और संयुक्त समिति के गठन की बात भी कही।
    • यानी इस्तीफे से पहले वह न केवल सक्रिय थे, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को भी आगे बढ़ा रहे थे।

    राजनाथ सिंह के कार्यालय में क्या हुआ?

    • सोमवार शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय में हलचल तेज हो गई थी।
    • सूत्रों के अनुसार भाजपा सांसदों को कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए।
    • कुछ सांसद बिना कुछ बोले आए और चले गए।
    • इसके बाद ही धनखड़ का इस्तीफा सामने आया।

    इसने यह संकेत दिया कि इस्तीफा पूर्वनियोजित हो सकता है, और इसके पीछे राजनीतिक रणनीति हो सकती है।

    क्या सरकार से टकराव बना कारण?

    कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धनखड़ सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद के कारण इस्तीफे की ओर बढ़े। किसानों के मुद्दे, महाभियोग प्रस्ताव की स्वीकृति, या विपक्ष के साथ संतुलन साधने की उनकी कोशिशें, इनमें से कोई भी बिंदु कारण हो सकता है।

    कितना कार्यकाल बाकी था?

    धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद संभाला था, और उनका कार्यकाल 2027 तक था। वे 74 वर्ष के हैं। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया जब विपक्ष के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण थे। उनके इस्तीफे के बाद अब उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति होंगे।

    अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा ?

    भारत के संविधान के अनुसार, 60 दिनों के भीतर उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराना अनिवार्य है। भाजपा अब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ उपराष्ट्रपति उम्मीदवार की तलाश में है। पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को आगे कर सकती है जो संवैधानिक अनुभव, राजनीतिक संतुलन और भविष्य की दिशा तय करने में सक्षम हो।

    विपक्ष का विरोध और संदेह

    कांग्रेस के नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी और अखिलेश प्रसाद सिंह ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की थी और बताया कि, “धनखड़ बिल्कुल स्वस्थ थे, उन्होंने इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया।” अब विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को सियासी चश्मे से देख रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ सेहत का मामला नहीं है, इसके पीछे राजनीतिक वजह हो सकती है।

    धनखड़ के इस्तीफे से पहले जिस तरह उन्होंने महाभियोग प्रस्ताव को प्रक्रिया में डाला, उसने उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाया। लेकिन क्या यह कदम सरकार के खिलाफ गया? क्या यह उनके इस्तीफे की वजह बना?

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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