जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 :आखिर क्यों मंदिर की तीसरी सीढ़ी से बचते हैं श्रद्धालु? जानिए 'यम शिला' से जुड़ी मान्यता

ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, रहस्यमयी घटनाओं और अनोखी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर साल यहां निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इस साल रथ यात्रा 16 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित की जा रही है।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इन सीढ़ियों को 'बैसी पहाचा' कहा जाता है। इन्हीं में से तीसरी सीढ़ी को लेकर एक विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है, जिसके कारण भक्त इस पर पैर रखने से बचते हैं।
22 सीढ़ियां क्या दर्शाती हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर की 22 सीढ़ियां मनुष्य के जीवन की 22 कमजोरियों, दोषों और बुराइयों का प्रतीक मानी जाती हैं। माना जाता है कि इन बुराइयों पर विजय प्राप्त करने के बाद ही व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ता है और मोक्ष की ओर बढ़ता है।
तीसरी सीढ़ी को क्यों कहा जाता है 'यम शिला'?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से लोग पापों से मुक्त होने लगे। इससे चिंतित होकर यमराज भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे और कहा कि यदि सभी लोग आसानी से पापमुक्त हो जाएंगे, तो यमलोक में कोई नहीं आएगा। तब भगवान जगन्नाथ ने यमराज से कहा कि वे मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर विराजमान हो जाएं। इसके बाद यह सीढ़ी 'यम शिला' के नाम से प्रसिद्ध हुई।
क्यों नहीं रखते भक्त इस सीढ़ी पर पैर?
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद यदि कोई श्रद्धालु इस तीसरी सीढ़ी यानी यम शिला पर पैर रख देता है, तो उसे दर्शन से प्राप्त पुण्य का फल नहीं मिलता। इसी विश्वास के कारण श्रद्धालु इस सीढ़ी को पार करते समय विशेष सावधानी बरतते हैं और इस पर पैर रखने से बचते हैं।
आस्था और परंपरा का प्रतीक है यह मान्यता
हालांकि, इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सदियों से श्रद्धालु मंदिर की इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी आज भी आस्था, श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।











