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जबलपुर का 7 किमी फ्लाईओवर बना मिसाल:अब हर बारिश में 10 लाख लीटर पानी जमीन में जाएगा

जबलपुर में बने प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है जिससे अब हर बारिश में लाखों लीटर पानी सीधे जमीन के अंदर जाएगा।
अब हर बारिश में 10 लाख लीटर पानी जमीन में जाएगा

नरेन्द्र सिंह, जबलपुर। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर एक बड़ी और व्यावहारिक पहल सामने आई है। जबलपुर में बने प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है जिससे अब हर बारिश में लाखों लीटर पानी सीधे जमीन के अंदर जाएगा।

प्रदेश का पहला फ्लाईओवर जहां लागू हुआ सिस्टम

मदनमहल एलआईसी से दमोह नाका तक करीब 7 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर को खास बनाने वाली बात इसका रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। यह प्रदेश का पहला ऐसा फ्लाईओवर है जहां इस तरह की व्यवस्था की गई है। इस सिस्टम के जरिए फ्लाईओवर पर गिरने वाला बारिश का पानी बर्बाद होने के बजाय संरक्षित किया जाएगा और उसे जमीन में रिचार्ज किया जाएगा।

कैसे जमीन में जाएगा पानी

फ्लाईओवर पर 10 रिचार्ज पिट बनाए गए हैं जिन्हें 100 से 150 फीट गहराई तक ड्रिल किया गया है। बारिश का पानी पाइपलाइन के जरिए सीधे इन पिट्स में पहुंचेगा और वहां से जमीन के भीतर समा जाएगा। अनुमान है कि बारिश के दिनों में करीब 1 एमएलडी यानी लगभग 10 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन में रिचार्ज हो सकेगा। इससे भू-जल स्तर को गिरने से रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।

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अब हर निर्माण में अनिवार्य होगा यह सिस्टम

प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अब विभाग द्वारा बनाए जाने वाले हर फ्लाईओवर, सड़क, पुल और भवन में वर्षाजल संचयन प्रणाली लगाना अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि अगर हर निर्माण में इस तरह की व्यवस्था लागू हो जाती है तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने भी सराहा कदम

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री शिवेन्द्र सिंह के अनुसार 7 किमी लंबे इस फ्लाईओवर में 10 जगह रिचार्ज पिट बनाए गए हैं जिनसे बारिश का पानी सीधे जमीन में जाएगा और भू-जल स्तर को गिरने से रोका जा सकेगा। भू-जल विशेषज्ञ डीके शुक्ल का कहना है कि यह पहल बेहद सराहनीय है और गिरते भू-जल स्तर को नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित हो सकती है। उनके मुताबिक इस तरह की व्यवस्था सभी निर्माण कार्यों में लागू होना एक सकारात्मक कदम है।

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क्यों अहम है यह पहल

शहरों में लगातार बढ़ते कंक्रीट स्ट्रक्चर की वजह से पानी जमीन में नहीं जा पाता जिससे भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में फ्लाईओवर जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को शामिल करना एक लंबी अवधि का समाधान माना जा रहा है। जबलपुर का यह मॉडल आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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