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जबलपुर के 34 करोड़ के धान परिवहन घोटाले की अब पूरे MP में जांच, हाईकोर्ट ने सभी कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट

जबलपुर के करीब 34 करोड़ रुपए के धान परिवहन घोटाले की अब पूरे मध्यप्रदेश में जांच होगी। हाईकोर्ट ने सभी कलेक्टरों से रिपोर्ट और EOW से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
जबलपुर के 34 करोड़ के धान परिवहन घोटाले की अब पूरे MP में जांच, हाईकोर्ट ने सभी कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट
जबलपुर के 34 करोड़ के धान परिवहन घोटाले की अब पूरे MP में जांच

मध्यप्रदेश के जबलपुर में सामने आए करीब 34 करोड़ रुपए के धान परिवहन घोटाले की जांच अब प्रदेश स्तर पर होगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में धान परिवहन से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आर्थिक अपराध ब्यूरो यानी EOW से भी मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के साथ जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं। अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह पता चलेगा कि जबलपुर में सामने आई गड़बड़ी कितने जिलों तक फैली हुई है।

स्कूटर और छोटे वाहनों से भी सैकड़ों क्विंटल धान का परिवहन

यह मामला नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट के सामने धान परिवहन में सामने आई गड़बड़ियों का ब्यौरा रखा। जांच में ऐसे वाहन नंबर सामने आए, जिनके जरिए 100 से 200 क्विंटल तक धान का परिवहन दर्ज किया गया था। इनमें दोपहिया और तिपहिया वाहनों के नंबर भी शामिल थे। कुछ मामलों में बसों और ऐसे अन्य वाहनों से भी धान का परिवहन दिखाया गया जिनकी क्षमता इतनी बड़ी मात्रा में धान ले जाने की नहीं थी।

जबलपुर में 90 से ज्यादा FIR, 19 गिरफ्तार

जबलपुर में जांच के बाद अलग-अलग मामलों में 90 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं। अब तक मामले में 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी, ऑपरेटर, राइस मिलर्स और सहकारी समितियों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। प्रमुख आरोपियों में प्रभारी जिला प्रबंधक दिलीप किरार, ऑपरेटर सुनील प्रजापति, बीएस मेहर और राइस मिलर्स मनदीप सिंह, प्रतीक सक्सेना और संजय जैन के नाम सामने आए हैं।

27 जिलों में जांच के आदेश का भी हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सरकार पहले ही प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दे चुकी है। कुछ जिलों में FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी सरकार की ओर से दी गई थी। हालांकि याचिकाकर्ता ने कहा कि केवल FIR दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। जबलपुर में जिस स्तर की गड़बड़ी सामने आई है, उसे देखते हुए पूरे प्रदेश में प्रभावी और विस्तृत जांच जरूरी है। याचिकाकर्ता के अनुसार मंडला, सिवनी, बालाघाट और डिंडौरी सहित कुछ अन्य जिलों में भी इस तरह की गड़बड़ियों से जुड़े मामले सामने आए हैं।

हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई का किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि अगर कलेक्टर ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो यह मामला सामने नहीं आता। बेंच ने माना कि इसी तरह दूसरे जिलों में भी अधिकारियों को धान परिवहन से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच करनी चाहिए थी। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कोर्ट ने पूरे प्रदेश में जांच की जरूरत महसूस की और सभी कलेक्टरों से रिपोर्ट तलब की।

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EOW को जांच की स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी

हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) को जबलपुर धान परिवहन घोटाले में चल रही जांच और अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। वहीं मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के जरिए यह जानकारी देनी होगी कि जबलपुर में तत्कालीन कलेक्टर की कार्रवाई के बाद प्रदेश स्तर पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अब सभी जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट और EOW की स्टेटस रिपोर्ट के बाद घोटाले की वास्तविक स्थिति की तस्वीर और साफ हो सकेगी।

जांच में 1.53 लाख क्विंटल धान का फर्जी परिवहन

जबलपुर में जुलाई 2025 में तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की जांच के दौरान धान परिवहन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई थी। जांच के मुताबिक 165 फर्जी वाहनों से 694 ट्रिप में करीब 1.53 लाख क्विंटल धान का परिवहन रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। कई ऐसे वाहन भी पाए गए जिनकी वास्तविक क्षमता 200 क्विंटल से कम थी लेकिन रिकॉर्ड में उनमें 400 क्विंटल तक धान लोड दिखाया गया। इसके अलावा 55 कार, पिकअप, ट्रैक्टर और अन्य कम क्षमता वाले वाहनों के नंबरों से 614 फर्जी ट्रिप लगाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई।

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राइस मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप

जांच में फर्जी परिवहन के जरिए शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई। मामले में राइस मिलर्स और एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं। विधायक अजय विश्नोई की शिकायत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी थी। इसके बाद जबलपुर के अलग-अलग थानों में FIR दर्ज की गईं और गिरफ्तारियां शुरू हुईं। जांच में जबलपुर के अलावा मंडला, सिवनी और बालाघाट में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई। इसी आधार पर नागरिक उपभोक्ता मंच ने पूरे प्रदेश में जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी जिलों में धान परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की जांच होगी। इससे यह सामने आने की उम्मीद है कि जबलपुर में पकड़ी गई गड़बड़ी अकेले जिले तक सीमित थी या प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह का खेल हुआ है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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