105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, उम्र को देखते हुए जेल से रिहाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे 105 वर्षीय कैदी रसिक चंद्र मंडल को बड़ी राहत देते हुए उनकी अंतरिम रिहाई को समय से पहले स्थायी रिहाई में बदलने का आदेश दिया है। मंडल को 1994 में हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। लंबे समय से जेल से बाहर आने की कोशिश कर रहे मंडल की उम्र को देखते हुए अदालत ने मानवीय आधार पर यह फैसला सुनाया।
1994 के हत्या मामले में मिली थी उम्रकैद
रसिक चंद्र मंडल का जन्म पश्चिम बंगाल के मालदा में हुआ था। हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें वर्ष 1994 में उम्रकैद की सजा मिली थी। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक जेल में सजा काटी। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और मानवीय परिस्थितियों को देखते हुए उनकी रिहाई की मांग अदालत के सामने रखी गई।
2020 में मांगी थी अंतरिम जमानत
मंडल की ओर से वर्ष 2020 में अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्हें पैरोल पर जेल से बाहर आने का अवसर मिला। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां उनकी अत्यधिक उम्र को देखते हुए अदालत ने राहत देने का फैसला किया।
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उम्र को देखते हुए बदला रिहाई का आदेश
CJI की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि मंडल की उम्र को देखते हुए उनकी अंतरिम रिहाई को समय से पहले रिहाई में बदल दिया जाना चाहिए। इस आदेश के बाद अब उन्हें दोबारा जेल भेजने के बजाय स्थायी रूप से रिहा किया जाएगा।
अदालत ने उम्र पर जताई हैरानी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंडल की उम्र को लेकर भी हैरानी जताई। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि 1920 के आसपास जन्मे व्यक्ति की उम्र अब 105 वर्ष हो चुकी है और वह अपने मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया में शामिल है। मंडल वर्ष 2020 से जेल से बाहर आने के लिए कानूनी राहत की कोशिश कर रहे थे।
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लंबे इंतजार के बाद मिली राहत
रसिक चंद्र मंडल के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लंबे कानूनी इंतजार के बाद मिली बड़ी राहत है। अदालत ने उनकी असाधारण उम्र और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जेल से समय से पहले रिहाई का रास्ता साफ कर दिया।





















