ITR Filing 2026:इनकम टैक्स नहीं बनता फिर भी क्यों भरना पड़ सकता है ITR? शेयर बाजार निवेशकों के लिए जानना जरूरी

भारत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि यदि उनकी सालाना आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो उन्हें ITR भरने की जरूरत नहीं है। पुराने टैक्स सिस्टम में 2.5 लाख रुपए और नए टैक्स सिस्टम में 4 लाख रुपए तक की आय पर ITR दाखिल करना अनिवार्य नहीं माना जाता। लेकिन टैक्स नियमों में कुछ ऐसे प्रावधान भी हैं जिनके कारण शून्य टैक्स देनदारी होने के बावजूद ITR फाइल करना जरूरी हो सकता है। खासकर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में निवेश या ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। नियमों की अनदेखी भविष्य में टैक्स विभाग की पूछताछ या नोटिस का कारण बन सकती है।
शेयर बाजार में घाटा हुआ है तो ITR भरना जरूरी
यदि आपने शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेशों में नुकसान उठाया है और उस नुकसान को भविष्य में होने वाले मुनाफे के साथ एडजस्ट करना चाहते हैं, तो आपको ITR दाखिल करना होगा। टैक्स नियमों के अनुसार किसी भी कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने के लिए समय पर ITR फाइल करना अनिवार्य है। हालांकि यदि आप उस नुकसान को आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं करना चाहते और आपकी आय टैक्स सीमा से नीचे है तो ITR भरना जरूरी नहीं होगा।
1.25 लाख रुपए तक का LTCG टैक्स फ्री
लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से एक वित्त वर्ष में होने वाला 1.25 लाख रुपए तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स फ्री होता है। इसका मतलब यह है कि इस सीमा तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। लेकिन टैक्स फ्री होने का अर्थ यह नहीं है कि इस आय को रिटर्न में दिखाने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को ITR के Schedule CG में अपनी खरीद और बिक्री का पूरा विवरण दर्ज करना चाहिए। सिस्टम स्वतः उपलब्ध छूट की गणना कर लेता है, लेकिन ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग करना जरूरी होता है।
F&O ट्रेडर्स के लिए अलग नियम
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में होने वाले लाभ या हानि को टैक्स नियमों में बिजनेस इनकम या बिजनेस लॉस माना जाता है। यदि किसी निवेशक को F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है और वह इसे भविष्य के मुनाफे के खिलाफ समायोजित करना चाहता है, तो ITR दाखिल करना अनिवार्य होगा। इसी तरह नियमित ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को भी अपनी ट्रेडिंग गतिविधियों की सही जानकारी रिटर्न में देनी चाहिए।
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इन परिस्थितियों में भी भरना पड़ सकता है ITR
भले ही आपकी आय टैक्स सीमा से कम हो, लेकिन कुछ विशेष मामलों में ITR दाखिल करना आवश्यक हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि आपने वर्ष के दौरान क्रेडिट कार्ड पर बड़ी राशि खर्च की है, विदेश यात्रा पर निर्धारित सीमा से अधिक खर्च किया है या बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया है तो टैक्स विभाग आपकी वित्तीय गतिविधियों की जानकारी मांग सकता है। ऐसी स्थिति में ITR दाखिल करना आपकी वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत बनाता है।
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ITR फाइल करने के फायदे
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही किसी व्यक्ति के लिए ITR भरना अनिवार्य न हो, फिर भी उसे नियमित रूप से रिटर्न दाखिल करना चाहिए। ITR एक महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज होता है, जिसकी जरूरत बैंक लोन, होम लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, वीजा आवेदन और कई अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में पड़ती है। इसके अलावा यदि भविष्य में टैक्स विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण मांगा जाता है तो नियमित रूप से दाखिल किया गया ITR आपकी वित्तीय स्थिति का मजबूत रिकॉर्ड साबित होता है।












