
सरकारी दफ्तरों की तस्वीर मन में आते ही फाइलों के ढेर, बड़े टेबल और अधिकारियों की कुर्सी पर बिछा सफेद तौलिया नजर आता है। देखने में साधारण लगने वाला यह तौलिया सिर्फ सफाई का हिस्सा नहीं बल्कि इसके पीछे पुरानी परंपरा, सुविधा और सरकारी व्यवस्था की एक दिलचस्प कहानी छिपी है, जो आज भी कई दफ्तरों में उसी तरह कायम है।
पुराने समय में सरकारी दफ्तरों में आज जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। न एयर कंडीशनर होते थे न आरामदायक चेयर कवर और न ही क्लाइमेट कंट्रोल की व्यवस्था। गर्मियों में कर्मचारी और अधिकारी लंबी दूरी तय करके दफ्तर पहुंचते थे। कई बार तेज धूप और पसीने के साथ सीधे कुर्सी पर बैठना पड़ता था। ऐसे में कुर्सी पर रखा सफेद तौलिया पसीना सोखने का काम करता था। इससे कुर्सी जल्दी गंदी नहीं होती थी और उसे बार बार साफ करने की जरूरत भी कम पड़ती थी। धीरे धीरे यह व्यवस्था हर सरकारी दफ्तर का एक जरूरी हिस्सा बन गई।
इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश काल से भी जोड़ी जाती है। ब्रिटिश ऑफिसर्स के लिए भारत का गर्म मौसम काफी मुश्किल होता था। उस समय दफ्तरों में आज जैसी ठंडक देने वाली सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए वे अपनी कुर्सियों पर सफेद कपड़ा या तौलिया रखते थे, इसका मकसद था बैठने में आराम मिलना और पसीना कुर्सी तक न पहुंचना। सफेद रंग इसलिए चुना गया क्योंकि इस पर गंदगी और दाग तुरंत दिखाई देते हैं, जिससे इसे समय समय पर धोना आसान रहता था। इसके साथ ही सफेद रंग गर्मी को कम सोखता है, जिससे थोड़ी ठंडक महसूस होती थी।
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पुराने समय में बालों में तेल लगाना आम बात थी। अधिकारी और कर्मचारी अक्सर तेल लगाकर दफ्तर पहुंचते थे। ऐसे में कुर्सी की बैकरेस्ट पर तेल के निशान पड़ने की संभावना रहती थी। इसी वजह से कुर्सी के पीछे सफेद तौलिया लगाया जाने लगा ताकि तेल के दाग सीधे कुर्सी पर न पड़ें। तौलिया आसानी से हटाकर धोया जा सकता था जिससे कुर्सी साफ और व्यवस्थित बनी रहती थी। यही कारण है कि आज भी कई सरकारी कुर्सियों पर तौलिया पीछे की तरफ बिछा दिखाई देता है।
सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिया इस्तेमाल होने के पीछे इसका रंग भी एक अहम वजह है। सफेद रंग साफ सफाई, अनुशासन और औपचारिकता का प्रतीक माना जाता है। इस पर हल्का सा भी दाग तुरंत नजर आ जाता है, जिससे सफाई बनाए रखना आसान हो जाता है। साथ ही इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। इसे धोकर और ब्लीच करके दोबारा नया जैसा बनाया जा सकता है। यही वजह है कि यह सरकारी दफ्तरों में लंबे समय से इस्तेमाल होता आ रहा है।
समय के साथ तौलिया सिर्फ सुविधा और साफ सफाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसे सरकारी दफ्तरों की पहचान के रूप में भी देखा जाने लगा है। कई लोग इसे अधिकारी की सीट का प्रतीक मानते हैं। किसी भी कार्यालय में सफेद तौलिया लगी कुर्सी देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि यह किसी वरिष्ठ अधिकारी या महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति की सीट है। इसी वजह से यह परंपरा आज भी कई जगह कायम है।
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