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OGAI के नए नियम:10 साल की राहत या यूजर्स के लिए बढ़ सकता है खतरा!

ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन किया गया है। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव गेम्स के सर्टिफिकेट की वैलिडिटी को लेकर किया गया है  जिसे 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है।
10 साल की राहत या यूजर्स के लिए बढ़ सकता है खतरा!
AI Generated Image

देश में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और अब यह सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक सेक्टर बन चुकी है। इसी बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन किया गया है जो 1 मई से पूरे देश में ऑनलाइन गेम्स की निगरानी करेगा। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव गेम्स के सर्टिफिकेट की वैलिडिटी को लेकर किया गया है  जिसे 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है।

गेमिंग कंपनियों को मिली बड़ी राहत

नई व्यवस्था के तहत गेम डेवलपर्स को बार-बार सर्टिफिकेट रिन्यू कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे कंपनियों का समय और लागत दोनों बचेंगे। खासकर स्टार्टअप्स के लिए यह फैसला काफी फायदेमंद माना जा रहा है क्योंकि उन्हें अब लंबे समय तक स्थिरता मिलेगी और वे अपने प्रोडक्ट पर ज्यादा फोकस कर पाएंगे।

तेजी से बढ़ रहा है ऑनलाइन गेमिंग बाजार

भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। मौजूदा समय में देश में 40 करोड़ से ज्यादा गेमर्स हैं और इंडस्ट्री का आकार 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है। हर साल इसमें 20 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ देखी जा रही है जिससे साफ है कि यह सेक्टर आने वाले समय में और बड़ा बनने वाला है।

हर गेम के लिए जरूरी नहीं होगा रजिस्ट्रेशन

नए नियमों के तहत जिन गेम्स में असली पैसों का लेन-देन नहीं होता, उन्हें अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से बाहर रखा गया है। वहीं रियल मनी गेम्स या बड़े स्तर पर खेले जाने वाले गेम्स को नोटिफिकेशन के बाद रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे छोटे डेवलपर्स को राहत मिलेगी और अनावश्यक प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

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10 साल की वैलिडिटी पर उठ रहे सवाल

हालांकि सर्टिफिकेट की वैलिडिटी बढ़ाने का फैसला इंडस्ट्री के लिए अच्छा है लेकिन इसके साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। टेक्नोलॉजी तेजी से बदलती है और गेम्स के कंटेंट व सिस्टम में भी समय के साथ बदलाव आते रहते हैं। ऐसे में 10 साल तक बिना दोबारा विस्तृत जांच के किसी गेम को चलने देना यूजर्स की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकता है।

यूजर सेफ्टी और डेटा प्राइवेसी बड़ी चुनौती

हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं जिनमें डेटा प्राइवेसी, फ्रॉड और गेमिंग एडिक्शन जैसे मुद्दे शामिल हैं। खासकर युवाओं में गेमिंग की लत और रियल मनी गेम्स में नुकसान को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में केवल कंपनियों को राहत देना काफी नहीं होगा बल्कि यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

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लाइट-टच रेगुलेशन का असली टेस्ट बाकी

सरकार ने इस बार ‘लाइट-टच रेगुलेशन’ का रास्ता चुना है यानी कम सख्ती के साथ संतुलित निगरानी। इसका मकसद इनोवेशन को बढ़ावा देना है लेकिन असली चुनौती इसे प्रभावी तरीके से लागू करना होगी। अगर निगरानी मजबूत रही तो यह सिस्टम गेमिंग इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है लेकिन ढील बरती गई तो यह यूजर्स के लिए खतरा भी बन सकता है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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