मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया की नजरें अब उस समुद्री रास्ते पर टिक गई हैं, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से Strait of Hormuz की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी। लेकिन इस अपील को अमेरिका के कई करीबी सहयोगियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने साफ कर दिया है कि, वे फिलहाल इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर अपने युद्धपोत नहीं भेजेंगे। इन फैसलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। क्योंकि यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में LNG की सप्लाई होती है।
अमेरिका-ईरान टकराव अब लंबे सैन्य तनाव में बदल चुका है। युद्ध का 17वां दिन चल रहा है और इस बीच सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता खाड़ी क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ता है और दुनिया के कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां संघर्ष बढ़ता है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग प्रभावित हो सकती है, इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने सहयोगी देशों से सुरक्षा सहयोग मांगा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, जो देश इस समुद्री रास्ते से तेल आयात करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा में योगदान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि वे इस मुद्दे पर सात देशों से बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि, जो देश इस रास्ते से सबसे ज्यादा तेल लेते हैं, उन्हें इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। उन्होंने खासतौर पर चीन का नाम लेते हुए कहा कि चीन को इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए क्योंकि वह इसी रास्ते से भारी मात्रा में तेल आयात करता है।
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जापान ने इस मामले में बेहद सतर्क रुख अपनाया है। जापान की प्रधानमंत्री सना ताकाइची (Sanae Takaichi) ने संसद में कहा कि, फिलहाल टोक्यो की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना भेजने का कोई इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि, हमने अभी एस्कॉर्ट जहाज भेजने का कोई फैसला नहीं किया है। हम अपने कानूनी ढांचे के भीतर उपलब्ध विकल्पों का अध्ययन कर रहे हैं।
जापान की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि, जापान अपने करीब 90% कच्चे तेल के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। देश की 11% LNG सप्लाई भी इसी रास्ते से गुजरती है। इसके बावजूद जापान ने सैन्य तैनाती से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है।
अमेरिका के करीबी सहयोगी देशों में शामिल ऑस्ट्रेलिया ने भी इस मामले में स्पष्ट इनकार कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की परिवहन मंत्री कैथरीन किंग (Catherine King) ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेज रहे हैं। हमें पता है कि यह रास्ता कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलहाल हम इस मिशन का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सहयोग कर रहा है।
इसके तहत संयुक्त अरब अमीरात में सहायता के लिए विमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। क्षेत्र में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।
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ट्रंप के एशियाई सहयोगियों में शामिल दक्षिण कोरिया ने भी इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि, स्थिति की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जा रही है। किसी भी सैन्य कदम से पहले अमेरिका के साथ चर्चा होगी। इससे साफ है कि एशियाई सहयोगी इस मामले में बेहद सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने भी ट्रंप के साथ बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। हालांकि उन्होंने युद्धपोत भेजने का कोई वादा नहीं किया, इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने की बात कही। ब्रिटेन इस संकट को लेकर कनाडा और अन्य सहयोगियों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है।
ट्रंप की अपील के बावजूद कई देशों ने इस सैन्य अभियान से दूरी बनाई है। इन देशों में शामिल हैं-
फ्रांस की रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक युद्ध की स्थिति बनी रहेगी, तब तक इस संवेदनशील इलाके में युद्धपोत भेजना उचित नहीं होगा।
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Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसकी अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि, वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% यहीं से गुजरता है। बड़ी मात्रा में LNG गैस की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है। खाड़ी देशों का अधिकांश तेल निर्यात इसी मार्ग से होता है।
इस मार्ग से गुजरने वाले प्रमुख देश-
इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करती है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो सकती है। शिपिंग कंपनियों के बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अगर यह संकट लंबा चला तो दुनिया में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
दोनों देशों ने सैन्य सहयोग से दूरी बनाई है, लेकिन वे इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर भी हैं। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर इसी रास्ते का उपयोग करता है। देश का करीब 90% कच्चा तेल और लगभग 11% LNG इसी मार्ग से होकर आता है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया भी इस रूट पर निर्भर है, जहां से उसके करीब 40 से 60 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया LNG का बड़ा निर्यातक देश है, लेकिन रिफाइंड फ्यूल के मामले में उसे आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बावजूद दोनों देशों ने फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तैनाती से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
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रविवार को ट्रंप ने NATO देशों को भी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि, अगर सहयोगी देश होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में मदद नहीं करते हैं, तो NATO का भविष्य अच्छा नहीं होगा। ट्रंप के इस बयान को कई देशों ने दबाव की रणनीति के रूप में देखा है।
ट्रंप ने खासतौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि, चीन इस समुद्री रास्ते से सबसे ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए उसे इसकी सुरक्षा में भूमिका निभानी चाहिए। भारत जैसे देशों के लिए भी इस समुद्री मार्ग का खुला रहना बेहद जरूरी है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है।
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प्रभाव |
संभावित परिणाम |
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तेल कीमत |
भारी उछाल |
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वैश्विक व्यापार |
शिपिंग संकट |
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ऊर्जा बाजार |
सप्लाई बाधित |
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अर्थव्यवस्था |
महंगाई बढ़ सकती है |