ईरान- अमेरिका युद्ध क्या नहीं रूकेगा?क्वॉड में अमेरिका ने कुछ ऐसा कहा जिसने बढ़ाई चिंता, पढ़ें 3 बड़े अपडेट्स

तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। ईरान- अमेरिका युद्ध जो अब तक वार्ता, सीजफायर के बाद भी थमा नहीं है। क्योंकि खाड़ी देश में आग ऐसे भड़की है कि वो सिर्फ बातचीत से शांत नहीं हो रही। वहीं इस इस युद्ध में पिछले 24 घंटे में 3 बड़े अपडेट्स सामने आएं हैं। जिसने दोनों देशों के बीच एक बार फिर से खटास पैदा कर दिए हैं। ईरान ने कहा कि वह अमेरिका का बोट्स पर किए हमले का बदला जरूर लेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्वॉड देशों की मीटिंग में एक अहम बयान दिया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींचा है।
पिछले 24 घंटे में हुई तीन बड़ी घटनाओं अमेरिका-ईरान तनातनी, QUAD में अमेरिकी बयान और पाकिस्तान के फैसले ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल होर्मुज को लेकर है, जहां किसी भी तनाव का असर सीधे तेल बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पढ़ें 3 बड़े अपडेट्स जिसने बढ़ाई चिंता
1. अमेरिका-ईरान तनाव फिर तेज
अमेरिका ने हाल में ईरान की कुछ मिसाइल साइट्स और हॉर्मुज के आसपास मौजूद नावों पर कार्रवाई की। वॉशिंगटन ने इसे ‘सेल्फ डिफेंस’ बताया, लेकिन ईरान ने इसे खुली आक्रामकता करार दिया।
2. QUAD बैठक में अमेरिका का सख्त संदेश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान के साथ समझौता इतनी जल्दी नहीं होगा। न्यूक्लियर प्रोग्राम और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों में मतभेद अब भी बने हुए हैं।
3. पाकिस्तान ने ठुकराया ट्रंप का प्रस्ताव
ट्रंप कैंप की ओर से पाकिस्तान पर इजरायल को मान्यता देने का दबाव बताया जा रहा था, लेकिन इस्लामाबाद ने साफ कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के बिना ऐसा संभव नहीं।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता माना जाता है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। ईरान ने दावा किया है कि उसे इस इलाके पर पूरा नियंत्रण हासिल है। वहीं अमेरिका समुद्री रास्तों को खुला रखने की रणनीति पर जोर दे रहा है। यही वजह है कि यह इलाका वैश्विक ताकतों की प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना हुआ है।
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न्यूक्लियर डील क्यों फंसी है?
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन भरोसे का संकट खत्म नहीं हुआ है।
- ईरान की मांग: पहले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिले।
- अमेरिका की शर्त: ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर सख्त सीमाएं और निगरानी स्वीकार करे।
- इन्हीं मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही, जिससे समझौते की राह मुश्किल बनी हुई है।
भारत समेत दुनिया के लिए क्यों जरूरी होर्मुज?
- भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। अगर होर्मुज में संकट गहराता है तो इसका असर भारत में भी दिख सकता है।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा
- महंगाई और सप्लाई चेन पर दबाव
- शेयर बाजारों में अस्थिरता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी और सैन्य तनाव बढ़ा, तो मध्य पूर्व का संकट सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।











