Peoples Update Special :नर्मदा-बेतवा की बदहाली पर बोलीं पीएचई मंत्री संपतिया उईके:कहा- नदियों के स्थायी रिवाइवल की जरूरत, 42 लाख परिवारों तक पहुंचाया नल से जल

राजीव सोनी,भोपाल। 'पीपुल्स समाचार' से विशेष चर्चा में पीएचई मंत्री उईके ने गृहनगर मंडला सहित प्रदेश में जल-जंगल और नदियों के साथ राजनैतिक मुद्दों पर भी बेबाकी से चर्चा की। 2022 के बाद प्रदेश में 42 लाख परिवारों को नल से जल पहुंचाया। उन्होंने विभागीय कामकाज में केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल, सीएम डॉ. मोहन यादव के के प्रति आभार भी जताया। और बताया कि जल गंगा संवर्धन और जल जीवन मिशन के अलावा 35 हजार सोख्ता गड्ढे, खेत-तालाब और मेढ़ बंधान पर काम चल रहा हैं। पेश है बातचीत के मुख्य अंश...
सवाल: ग्वालियर-चंबल, निमाड़ सहित बुंदेलखंड के अंचलों को जल संकट से मुक्ति कब मिलेगी?
जवाब: पेयजल उपलब्ध कराने पर लगातार काम हो रहा है। 147 योजनाएं मंजूर हुई थीं। इनमें 52 स्कीम तो बल्क वाटर स्कीम की हैं। भूजल नीचे जाने पर ट्यूब वेल चार्जिंग, सोख्ता गड्ढा और खेत तालाब जैसे अभियान कारगर हुए हैं।
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सवाल: उद्गम स्थल पर ही नर्मदा और बेतवा जैसी नदियां सूखने लगी हैं?
जवाब: यह वाकई चिंता की बात है, मेरे मंडला जिले के 9 में से 7 विकासखंड नर्मदा से घिरे हैं। नदी को सदानीरा बनाने पौधरोपण सहित विस्तृत कार्ययोजना पर काम करेंगे।
सवाल: बेतवा के अलावा शिप्रा और चंबल सहित अन्य कई नदियों की भी यह कहानी है?
जवाब: सरकार सभी नदियों के संरक्षण के लिए गंभीर है। बेतवा रिवाइवल प्रोजेक्ट जल्दी ही शुरू करेंगे।
सवाल: नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में जंगल कटाई,उत्खनन और अतिक्रमण भी बड़ा कारण है?
जवाब: इस संबंध में सीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, कई क्षेत्रों में कार्रवाई चल भी रही है।
सवाल: बेहतर जल प्रबंधन के लिए कोई नवाचार हुए क्या?
जवाब: पीएचई और जल निगम के अधिकारियों का संविलयन कर एक ऑफिस से काम होंगे। पंचायतों को भी गाइड करेंगे। फेज-2 में भी नवाचार कर रहे हैं।
सवाल: प्रदेश के कई क्षेत्रों में तो भूजल बहुत तेजी से नीचे चला गया, इसका क्या उपाय है?
जवाब: जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं है वहां हैंडपंपों की मरम्मत, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और भू-जल सवंर्धन पर जोर है। इसके लिए हम समाज में भी जनजागरुकता फैला रहे हैं।
सवाल: राज्यसभा के कार्यकाल और वर्तमान दायित्व को लेकर क्या फर्क महसूस करती हैं?
जवाब: राज्यसभा में 5 साल काफी कुछ सीखने को मिला। अब मैदानी स्तर पर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने का हरसंभव प्रयास रहता है।












