Iran- US War :सीजफायर के बीच अमेरिका का होर्मुज में ईरानी बोट्स पर हमला, मार्को रूबियो बोले हर हाल में खुलेगा होर्मुज

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर और समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इसी बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास उन ईरानी बोट्स को निशाना बनाया, जिन पर समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप है। इसके अलावा बंदर अब्बास पोर्ट के पास एक सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। अमेरिका के मुताबिक, इन गतिविधियों से उसके युद्धपोतों और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को खतरा था।
क्यों जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचता है। इसलिए यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या रास्ता बंद होने की आशंका का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। इसी वजह से अमेरिका, उसके सहयोगी देश और तेल बाजार इस इलाके पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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मार्को रूबियो बोले- हर हाल में खुला रहेगा होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं होने दिया जाएगा। जयपुर दौरे पर पहुंचे रूबियो ने पत्रकारों से कहा कि यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “होर्मुज खुला होना चाहिए और यह किसी न किसी तरीके से खुला रहेगा।” रूबियो ने वहां चल रही गतिविधियों को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।
तेहरान का दावा- युद्ध में क्षतिग्रस्त ज्यादातर इमारतों की मरम्मत पूरी
तेहरान सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने दावा किया है कि अमेरिकी और इजराइली हमलों में प्रभावित अधिकांश इमारतों की मरम्मत लगभग पूरी हो चुकी है। प्रशासन के मुताबिक, जिन भवनों को हल्का नुकसान पहुंचा था, उनमें से 97% की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। हालांकि गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त ढांचों पर काम अभी भी जारी है।
ट्रंप ने यूरेनियम पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान के हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का मुद्दा समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है। उनके मुताबिक, यह सामग्री या तो अमेरिका को सौंपनी होगी ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर ईरान के साथ मिलकर वहीं खत्म किया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ईरान के साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसी परमाणु डील नहीं करेंगे। उनका कहना है कि या तो मजबूत समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा।
बातचीत में क्या अटका है?
दोहा में चल रही वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट, हाईली एनरिच्ड यूरेनियम और ईरान की फ्रीज संपत्तियां सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, अब तक अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि देश में कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा।
ईरान की नई शर्तें क्या हैं?
ईरान ने अमेरिका के सामने भरोसा बहाल करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें दोबारा हमला नहीं करने की गारंटी, तेल प्रतिबंध हटाना, जब्त संपत्तियां लौटाना, नौसैनिक दबाव कम करना और क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजराइल युद्ध खत्म करना चाहते थे, लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया के बाद उन्हें बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा।
दुनिया की नजर क्यों टिकी है?
नई दिल्ली में हुई क्वाड देशों की बैठक में भी होर्मुज का मुद्दा उठा। ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि समुद्री रास्तों की आजादी और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है। उधर, ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से ज्यादा बड़ा और सख्त होगा। फिलहाल, वार्ता जारी है, लेकिन सैन्य कार्रवाई और सख्त बयानों ने यह साफ कर दिया है कि समझौते की राह अभी आसान नहीं है।











