Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

ईरान में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन :45 की मौत; इंटरनेट-फोन बंद, ट्रंप की चेतावनी के बाद अलर्ट पर सेना

ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और गिरती मुद्रा के खिलाफ पिछले 13 दिनों से चल रहा जनआंदोलन हिंसक हो गया है। तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन, आगजनी और नारेबाजी हुई। अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात काबू में करने के लिए सरकार ने इंटरनेट-फोन सेवाएं बंद कर दी हैं और सेना को अलर्ट पर रखा गया है।
45 की मौत; इंटरनेट-फोन बंद, ट्रंप की चेतावनी के बाद अलर्ट पर सेना
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    तेहरान। ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और गिरती मुद्रा के खिलाफ पिछले 13 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। गुरुवार रात हालात बेहद बेकाबू हो गए, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से अधिक शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं, जबकि तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया है। ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया और सेना को अलर्ट मोड पर रखा है

    100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन, सड़कों पर आगजनी

    अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के बड़े शहरों तेहरान, मशहद, इस्फहान, शिराज और तबरीज में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सड़कों को ब्लॉक किया, वाहनों और सरकारी संपत्तियों में आग लगाई। खामेनेई को मौत और इस्लामिक रिपब्लिक का अंत जैसे नारे भी लगाए। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में राष्ट्रीय ध्वज फाड़ने की घटनाएं भी सामने आईं।

    8 बच्चों समेत 45 की मौत

    अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसियों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं।

    इसके अलावा:

    • एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या।
    • 2,270 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
    • कई शहरों में छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग।
    • तेहरान में बाजार बंद रहे और छात्रों ने कई यूनिवर्सिटी कैंपस पर कब्जा कर लिया। 

    डिजिटल ब्लैकआउट: इंटरनेट, फोन और सैटेलाइट पर रोक

    बढ़ती हिंसा के बीच ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं। इंटरनेट वॉचडॉग NetBlocks के मुताबिक, यह कदम हिंसक दमन की तैयारी का संकेत है। हालांकि, इसके बावजूद कुछ लोग Starlink जैसे सैटेलाइट माध्यमों से वीडियो और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। जिनमें सड़क पर मार्च, खून से लथपथ प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबलों की कार्रवाई दिखाई दे रही है।

    बुजुर्ग महिला ने शासन को दी चुनौती

    प्रदर्शनों के बीच एक बुजुर्ग महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला के मुंह से खून निकलता दिख रहा है। वह कहती है- मुझे सरकार से डर नहीं लगता। यह वीडियो ईरान में आम लोगों के बढ़ते गुस्से और भयमुक्त विरोध का प्रतीक बन गया है।

    रजा पहलवी की अपील के बाद प्रदर्शन और उग्र

    निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अपील के बाद गुरुवार को आंदोलन और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने ‘यह आखिरी लड़ाई है’, ‘शाह पहलवी लौटेंगे’ जैसे नारे लगाए। रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं और वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं।

    Twitter Post

    रजा पहलवी का बयान और ट्रंप को धन्यवाद

    रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, आज रात लाखों ईरानी आजादी के लिए सड़कों पर उतरे हैं। सरकार ने सभी कम्युनिकेशन चैनल बंद कर दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि, अब यूरोपीय देशों को भी चुप्पी तोड़कर ईरानी जनता के समर्थन में आगे आना चाहिए।

    ट्रंप की चेतावनी- ‘लोगों को मारा गया तो हमला करेंगे’

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि, अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा गया, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि, अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो हम उन्हें बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएंगे।

    महंगाई और गिरती करेंसी बनी आंदोलन की जड़

    • ईरान में गुस्से की सबसे बड़ी वजह आर्थिक संकट है।
    • दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति डॉलर तक पहुंच गई।
    • साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी।
    • खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% तक बढ़ोतरी।
    • दवाइयों की कीमतों में 50% उछाल।
    • 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव।

    इन हालातों ने खासकर Gen Z और युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

    47 साल बाद फिर सत्ता परिवर्तन की मांग

    1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में धार्मिक शासन कायम है।

    खुमैनी: 1979-1989

    खामेनेई: 1989 से अब तक (37 साल)

    लगातार आर्थिक बदहाली, प्रतिबंध और आज़ादी की कमी के कारण अब लोग क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारी उन्हें धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं।

    ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था और तेल पर निर्भरता

    ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर निर्भर है।

    2024 में निर्यात: 22.18 अरब डॉलर

    आयात: 34.65 अरब डॉलर

    व्यापार घाटा: 12.47 अरब डॉलर

    2025 में घाटा बढ़कर 15 अरब डॉलर

    चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जहां 90% तेल निर्यात जाता है। इसके बावजूद 2025 में GDP ग्रोथ सिर्फ 0.3% रहने का अनुमान है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    Latest Posts