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Crude Oil Revenue :भारत को तेल बेचकर ईरान कितना कमाता है? जानिए एक बैरल से कितनी होती है कमाई

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां तेल का उत्पादन अन्य देशों की तुलना में कम लागत में होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बैरल कच्चा तेल निकालने में ईरान को औसतन 10 से 20 डॉलर का खर्च आता है।
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भारत को तेल बेचकर ईरान कितना कमाता है? जानिए एक बैरल से कितनी होती है कमाई

तेल अवीव। ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव खत्म होने के बाद वैश्विक तेल बाजार एक बार फिर सामान्य होता नजर आ रहा है। संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ा दी थी। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण रही। अब जब हालात शांत हो चुके हैं, तो एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरान हर बैरल कच्चा तेल बेचकर कितना मुनाफा कमाता है।

एक बैरल निकालने में कितना खर्च आता है?

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां तेल का उत्पादन अन्य देशों की तुलना में कम लागत में होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बैरल कच्चा तेल निकालने में ईरान को औसतन 10 से 20 डॉलर का खर्च आता है। इसकी वजह देश के विशाल और आसानी से उपलब्ध तेल भंडार हैं। कुछ पुराने ऑयल फील्ड में यह लागत इससे भी कम हो सकती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने पर ईरान को अच्छा-खासा मुनाफा मिलता है।

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एक बैरल पर 50 से 70 डॉलर तक की कमाई

एक मानक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 69 से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई है। यदि ईरान लगभग 15 डॉलर की लागत में एक बैरल तैयार करता है और उसे करीब 70 डॉलर में बेचता है, तो उत्पादन, परिवहन और अन्य खर्च निकालने के बाद भी उसे प्रति बैरल लगभग 50 से 70 डॉलर तक का शुद्ध लाभ हो सकता है। यही वजह है कि तेल निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार बना हुआ है।

प्रतिबंधों के दौर में दी छूट, अब बढ़ी कीमतें

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के समय ईरान ने खरीदार देशों को आकर्षित करने के लिए बाजार भाव से कम कीमत पर तेल बेचा। भारत और चीन जैसे देशों को कई बार 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट मिलने की खबरें सामने आईं। हालांकि, प्रतिबंधों में राहत और वैश्विक मांग बढ़ने के बाद ईरान अब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के करीब या कुछ मामलों में उससे 2 से 3 डॉलर अधिक कीमत पर भी तेल बेच रहा है।

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रुपए-रियाल व्यवस्था से दोनों देशों को फायदा

भारत और ईरान के बीच व्यापार की एक खास बात वैकल्पिक भुगतान प्रणाली रही है। कई मौकों पर भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय रुपये-रियाल व्यवस्था के जरिए किया गया। इससे ईरान भारत में जमा राशि का इस्तेमाल दवाइयां, चाय, चावल और अन्य जरूरी सामान खरीदने में कर सका। इस व्यवस्था ने दोनों देशों के व्यापार को आसान बनाने के साथ डॉलर पर निर्भरता भी कम करने में मदद की।

कच्चे तेल से जुड़ी बातें जो आपके लिए जानना है जरूरी

एक बैरल में कितना तेल होता है?

एक मानक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीद-बिक्री इसी इकाई में होती है।

ईरान का उत्पादन खर्च कितना है?

ईरान में एक बैरल तेल निकालने की औसत लागत 10 से 20 डॉलर के बीच मानी जाती है, जो कई देशों से कम है।

प्रति बैरल कितना मुनाफा?

मौजूदा कीमतों के आधार पर उत्पादन और परिवहन खर्च निकालने के बाद ईरान को करीब 50 से 70 डॉलर तक का शुद्ध लाभ हो सकता है।

भारत को क्यों मिलता था सस्ता तेल?

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दौरान ईरान ने खरीदार देशों को आकर्षित करने के लिए 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट दी थी।

रुपया-रियाल व्यवस्था क्या है?

इस व्यवस्था में भुगतान पूरी तरह डॉलर में नहीं होता। ईरान भारत में जमा राशि से भारतीय सामान जैसे दवा, चाय और चावल खरीद सकता है।

भारत के लिए ईरानी तेल क्यों अहम है?

कम कीमत और आसान भुगतान व्यवस्था के कारण ईरानी कच्चा तेल भारत के लिए लंबे समय तक एक किफायती विकल्प माना जाता रहा है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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