होर्मुज स्ट्रेट में फिर हमला! 21 भारतीय नाविकों वाले तेल टैंकर में लगी आग, समुद्री व्यापार पर संकट

समुद्र का रास्ता, तेल से भरा टैंकर और चारों तरफ युद्ध का खतरा! पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। बुधवार को कुवैत के झंडे वाले तेल टैंकर M/T अल दसमा पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। जहाज पर 21 भारतीय नाविकों समेत अन्य क्रू मेंबर भी मौजूद थे। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई, लेकिन बाद में आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह है कि सभी भारतीय नाविक और बाकी क्रू मेंबर सुरक्षित हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों वाले जहाज पर हमला
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर M/T अल दसमा पर हुए हमले ने एक बार फिर समुद्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि, आग बुझा दी गई और जहाज पर मौजूद सभी लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ा हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और दूसरे जरूरी सामान की ढुलाई होती है। ऐसे में इस रास्ते पर किसी भी हमले का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
अक्टूबर में भारतीय नाविकों से जुड़ी पांचवीं घटना
भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर अक्टूबर में हमलों की यह पांचवीं घटना बताई जा रही है। इन घटनाओं में अब तक 11 भारतीय नाविक घायल हुए हैं, जबकि दो भारतीयों के लापता होने की जानकारी है। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण भारत ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। समुद्र में अपना काम कर रहे लोगों को संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने व्यापारिक जहाजों पर हमलों को कानूनी और नैतिक, दोनों नजरियों से गलत बताया है। सरकार ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनी रहनी चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
भारत के विदेश मंत्रालय ने व्यापारिक जहाजों, उन पर काम करने वाले नाविकों और आम लोगों के इस्तेमाल वाले जरूरी बुनियादी ढांचे पर हमले तुरंत रोकने की अपील की है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। सरकार के मुताबिक, भारतीय नाविकों से जुड़ी घटनाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए जहाज चलाने वाली कंपनियों के संपर्क में रहा जा रहा है, ताकि नाविकों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जा सके। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं। समुद्री रास्तों पर बढ़ता खतरा उनके जीवन के साथ-साथ वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है।
बारूदी सुरंग से टकराकर डूबा था GFS प्राइड
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए खतरा केवल प्रोजेक्टाइल हमलों तक सीमित नहीं है। इससे पहले एक मालवाहक जहाज समुद्री बारूदी सुरंग से टकराने के बाद डूब गया था। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने 14 अक्टूबर को इस घटना की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के बारूदी सुरंग से टकराने के बाद उसमें आग लग गई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट में डूबने वाले जहाज का नाम GFS प्राइड बताया गया। यह सिंगापुर के झंडे के तहत चल रहा था और एक बार में 2,824 कंटेनर ले जाने की क्षमता रखता था। जहाज के संचालन की जिम्मेदारी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक कंपनी के पास थी। बताई गई जानकारी के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मामला था, जब होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंग से टकराकर कोई जहाज डूबा। इस घटना ने समुद्री रास्तों पर मौजूद खतरों को और गंभीर बना दिया।
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ईरान पर हमलों के बाद समुद्री व्यापार प्रभावित
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर पाबंदियां लगाई हैं और कई जहाजों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। इसका असर शिपिंग कंपनियों पर भी पड़ा है। सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने के कारण कई कंपनियां इस रास्ते से अपने जहाज भेजने से बच रही हैं। इससे माल की ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 अक्टूबर को होर्मुज स्ट्रेट से केवल सात मालवाहक जहाज गुजरे थे। हालांकि, इस रास्ते से आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है। कुछ जहाज अब भी यहां से गुजर रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या युद्ध से पहले के मुकाबले काफी कम है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला अहम समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति, जहाजों के बीमा खर्च और माल ढुलाई की लागत पर असर पड़ सकता है। लगातार हो रहे हमलों के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बड़ा मुद्दा बन गई है। भारत ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर सुरक्षा और आवाजाही की आजादी बनाए रखना जरूरी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्षेत्र में तनाव कम करने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




















