ट्रंप के ‘मुस्लिम पेरिस’ वाले बयान पर मैक्रों का पलटवार, बोले- ऐसी बातें मूर्खतापूर्ण और अस्वीकार्य..!

पेरिस। फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। इस बयान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आपत्ति जताई और इसे देश की स्थिति का गलत चित्रण करने वाला बताया। मैक्रों के अनुसार, कुछ विदेशी नेता फ्रांस में हुई घटनाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। इस विवाद में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टिप्पणी भी चर्चा में है।
ट्रंप ने पेरिस को लेकर क्या कहा था?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक रैली के दौरान फ्रांस की स्थिति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया कि देश में प्रवासियों, जिहादियों और कम्युनिस्टों का प्रभाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने फ्रांस में हुई लूटपाट और आगजनी का जिक्र करते हुए कहा कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन सकता है। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों की आलोचना भी की और सीमा पर सख्ती बढ़ाने की सलाह दी। ट्रंप ने फ्रांस की घटनाओं को अमेरिका की राजनीति से भी जोड़ा। उन्होंने अपने समर्थकों को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका में डेमोक्रेट्स सत्ता में आए, तो वहां भी ऐसी स्थिति बन सकती है। उनके इन बयानों ने फ्रांस और अमेरिका के बीच राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
मैक्रों ने क्यों बताया बयान को मूर्खतापूर्ण?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने विदेशी नेताओं की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग फ्रांस में हुई घटनाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रचार के लिए कर रहे हैं। मैक्रों के मुताबिक, ऐसी टिप्पणियां न केवल मूर्खतापूर्ण हैं, बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य भी हैं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनका इशारा ट्रंप की ओर है, तो मैक्रों ने कहा कि उनका बयान दूसरे नेताओं के साथ ट्रंप पर भी लागू होता है। उन्होंने फ्रांस में हिंसा को प्रवासियों और इस्लामवादियों से जोड़ने वाले दावों को गलत बताया। मैक्रों का कहना है कि देश में हुई घटनाओं को लेकर बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, विदेशी नेताओं को फ्रांस के हालात पर टिप्पणी करते समय तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए।
AI से बनी तस्वीरों और गलत जानकारी पर भी उठाए सवाल
मैक्रों ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। इनमें ऐसी घटनाएं दिखाई जा रही हैं, जो वास्तव में फ्रांस में हुई ही नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है और देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने भी गलत जानकारी के प्रसार पर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर संबंधित देशों के सामने इस मामले को उठाया जा सकता है। फ्रांस सरकार का जोर हिंसा से जुड़ी वास्तविक घटनाओं और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के बीच अंतर स्पष्ट करने पर है।
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नेतन्याहू के बयान से भी बढ़ा विवाद
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी फ्रांस के हालात पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि फ्रांस को कट्टरपंथी इस्लाम से जुड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने फ्रांसीसी अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। इन बयानों के बाद फ्रांस में जारी अशांति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, मैक्रों ने इस पूरे मामले में गलत जानकारी और राजनीतिक प्रचार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ाने और हालात पर नियंत्रण पाने के लिए कदम उठाए हैं। अब देखना होगा कि फ्रांस सरकार स्थिति को सामान्य बनाने और सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।




















