अटलांटिक महासागर का नाम बदलना चाहते हैं ट्रंप, Google CEO सुंदर पिचाई ने क्यों किया इनकार?

कभी किसी जगह का नाम बदलने की बात, तो कभी किसी देश को अपना 51वां राज्य बनाने का दावा! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति में नाम बदलने का मुद्दा लगातार चर्चा में रहता है। अब उनकी नजर अटलांटिक महासागर पर है। ट्रंप चाहते हैं कि अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘अमेरिकन महासागर’ कर दिया जाए। इसके लिए उन्होंने Google के CEO सुंदर पिचाई से भी बात की, लेकिन इस बार उनकी दाल नहीं गली। सुंदर पिचाई ने साफ कर दिया कि महासागर का नाम बदलना इतना आसान नहीं है।
ट्रंप ने सुंदर पिचाई से क्या कहा?
अमेरिकी राज्य दक्षिण कैरोलाइना में एक रैली के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने Google CEO सुंदर पिचाई के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने पिचाई से अटलांटिक महासागर का नाम बदलने को लेकर बात की थी। ट्रंप ने कहा कि सुंदर पिचाई बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्होंने उनसे अटलांटिक महासागर का नाम बदलने की बात कही, लेकिन पिचाई ने इस प्रस्ताव को आसान नहीं बताया। ट्रंप के अनुसार, सुंदर पिचाई ने कहा कि महासागरों का मामला अलग है और इसमें कई तरह की समस्याएं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह प्रशांत महासागर का नाम बदलने के बारे में भी सोच रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी योजना अटलांटिक महासागर तक सीमित है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर इसका नाम ‘अमेरिकन महासागर’ रखा जाता है, तो यूरोप के देश इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे।
सुंदर पिचाई ने क्यों जताई असहमति?
ट्रंप के मुताबिक, सुंदर पिचाई ने उन्हें समझाया कि महासागरों के नाम बदलने में बड़ी समस्या है, क्योंकि ये कई देशों से जुड़े होते हैं। इसलिए Google Maps पर उनका नाम बदलना कोई सामान्य बदलाव नहीं है। दरअसल, अटलांटिक महासागर कई देशों के तटों से जुड़ा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका नाम लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इसे केवल एक देश की पसंद के आधार पर नया नाम देना आसान नहीं है। हालांकि, ट्रंप ने इस बातचीत का जिक्र अपने अंदाज में किया, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि Google ने किसी आधिकारिक नाम परिवर्तन प्रक्रिया को शुरू किया था। फिलहाल अटलांटिक महासागर का नाम बदलने को लेकर कोई आधिकारिक बदलाव सामने नहीं आया है।
कौन हैं Google CEO सुंदर पिचाई?
सुंदर पिचाई भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी हैं। वह दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल Google के CEO हैं। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा हासिल की और टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। आज सुंदर पिचाई Google के बड़े फैसलों और कंपनी की रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। ट्रंप के साथ उनकी बातचीत का यह किस्सा इसलिए चर्चा में है, क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति की एक बड़ी इच्छा और टेक्नोलॉजी कंपनी के सामने आने वाली व्यावहारिक मुश्किलें दोनों दिखाई देती हैं।
पहले भी कई जगहों के नाम बदल चुके हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई जगहों के नाम बदलने या उन्हें नया नाम देने की बात कह चुके हैं। उनके दूसरे कार्यकाल में यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आया है। इस साल की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने की पहल की थी। इसके बाद Google Maps पर अमेरिका में इसे ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ के नाम से दिखाया जाने लगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में नाम अलग दिखाई दे सकता है। इसी तरह, ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कहने की बात भी कही थी। हालांकि, किसी जगह को नया नाम देने की राजनीतिक घोषणा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस नाम को स्वीकार किया जाना दो अलग बातें हैं।
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ग्रीनलैंड और कनाडा को लेकर भी दिए थे बयान
ट्रंप की नाम बदलने और क्षेत्रीय दावों से जुड़ी राजनीति केवल महासागरों तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम बताया और इसे खरीदने की इच्छा भी जाहिर की थी। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात भी कही थी। इसके अलावा, ट्रंप कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने से जुड़ा बयान दे चुके हैं। इन बयानों के चलते अमेरिका के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं।
नाम बदलने की राजनीति से क्या हासिल करना चाहते हैं ट्रंप?
राजनीतिक विश्लेषण के नजरिए से देखें तो किसी जगह के नाम में ‘अमेरिका’ जोड़ना देश की पहचान और प्रभाव को दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। ट्रंप अपनी राजनीतिक शैली में अमेरिका की ताकत और उसके हितों को प्रमुखता देते रहे हैं। हालांकि, किसी महासागर या भौगोलिक क्षेत्र का नाम बदलना केवल राजनीतिक इच्छा से तय नहीं होता। इसमें ऐतिहासिक परंपराएं, अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल और संबंधित देशों की भूमिका भी मायने रखती है। फिलहाल अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘अमेरिकन महासागर’ करने का प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रंप ने सुंदर पिचाई के साथ बातचीत का जिक्र जरूर किया, लेकिन Google की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बदलाव घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप इस विचार को आगे बढ़ाते हैं या यह बयान भी उनकी चर्चित राजनीतिक घोषणाओं में शामिल होकर रह जाता है।




















