S-400 बनाम S-500: रूस के एयर डिफेंस सिस्टम में क्या अंतर है, जानें डिटेल

मॉस्को। रूस के S-400 और S-500 दोनों ही मोबाइल, जमीन पर आधारित एयर-डिफेंस सिस्टम हैं, जिन्हें लंबी दूरी से आने वाले खतरों को रोकने (इंटरसेप्ट) के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन रूस के व्यापक एयर और मिसाइल-डिफेंस नेटवर्क में इन दोनों की भूमिका अलग-अलग है। S-400 एक परिपक्व सिस्टम है, जिसे मुख्य रूप से विमानों, क्रूज मिसाइलों और कुछ बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है। वहीं, नया S-500 सिस्टम इन क्षमताओं को और आगे बढ़ाता है, इसमें आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों और अंतरिक्ष की सीमा के करीब मौजूद लक्ष्यों को रोकने पर ज्यादा जोर दिया गया है। इनके बीच सबसे बड़ा अंतर केवल रेंज का नहीं है। बल्कि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर सिस्टम किस प्रकार के खतरों का सामना करने के लिए बना है, इसमें किस तरह के इंटरसेप्टर और रडार का उपयोग होता है। इसकी बताई गई क्षमताओं में से कितनी क्षमताओं को स्वतंत्र रूप से वेरीफाई किया जा सकता है।
S-400 रूस का स्थापित लंबी दूरी का एयर-डिफेंस सिस्टम
S-400 ट्रायम्फ (जिसे NATO में SA-21 ग्राउलर कहा जाता है) 2007 में सर्विस में शामिल हुआ था। इसे विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों सहित कई तरह के हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही यह बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ भी सीमित सुरक्षा देता है। यह सिस्टम हर तरह के लक्ष्य के लिए एक ही मिसाइल पर निर्भर रहने के बजाय, अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है।
मारक क्षमता मिसाइल पर आधारित
S-400 की अधिकतम मारक क्षमता (रेंज) इस बात पर निर्भर करती है कि कौन सी मिसाइल इस्तेमाल हो रही है। 40N6 सीरीज की मिसाइलें 400 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकती हैं। वहीं, अन्य इंटरसेप्टर मिसाइलों की रेंज कम होती है और उनका काम करने का दायरा भी अलग होता है। इस आंकड़े को उस दूरी से नहीं जोड़ना चाहिए जिस पर यह सिस्टम हर टारगेट को भरोसेमंद तरीके से खोज सके या उसे नष्ट कर सके। क्योंकि, इसमें रडार कवरेज, टारगेट की ऊंचाई और टारगेट की विशेषताओं जैसी कई बातें मायने रखती हैं। इसलिए, S-400 का मुख्य काम बड़े इलाके में हवाई सुरक्षा (Air Defense) प्रदान करना है। यह एक बड़े क्षेत्र में विमानों और अन्य हवाई लक्ष्यों के लिए खतरा बन सकता है। यह साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ सुरक्षा की एक सीमित परत भी देता है। हालांकि, यह हर तरह के विशेष रणनीतिक मिसाइल-रक्षा तंत्र (Strategic Missile-Defense System) का पूरी तरह विकल्प नहीं है।
S-500 है मिसाइल रक्षा का एडवांस स्तर
S-500 प्रोमेथियस (Prometheus) को रूस की सुरक्षा व्यवस्था में एक अधिक स्पेशल लेयर जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख क्षमताओं में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना शामिल है। रूसी दावों के मुताबिक, यह कुछ हाइपरसोनिक हथियारों और पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है। इस सिस्टम में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए 77N6 इंटरसेप्टर फैमिली और एयरक्राफ्ट व क्रूज मिसाइलों के लिए 40N6M इंटरसेप्टर शामिल हैं। इसका बाद वाला हिस्सा S-400 से काफी हद तक मिलता-जुलता है, यानी दोनों की क्षमताएं पूरी तरह अलग नहीं हैं।
दावा - हाइपरसोनिक हथियारों या उपग्रहों को रोक सकता है
ओपन-सोर्स अनुमानों के अनुसार, S-500 की अधिकतम इंटरसेप्टर रेंज लगभग 500-600 किलोमीटर है। लेकिन इन आंकड़ों को हर तरह के लक्ष्य के खिलाफ सटीक एंगेजमेंट रेंज (लक्ष्य को भेदने की दूरी) के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके रडार सिस्टम में सामान्य हवाई निगरानी के साथ-साथ बैलिस्टिक खतरों की विशेष ट्रैकिंग और उन्हें नष्ट करने की क्षमता भी शामिल है। यह दावा कि S-500 हाइपरसोनिक हथियारों या उपग्रहों को रोक सकता है। हालांकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से इन क्षमताओं के पूर्ण प्रदर्शन की पुष्टि नहीं होती है और इस सिस्टम के सबसे विशेष इंटरसेप्टरों के बारे में बहुत कम जानकारी मौजूद है।
दोनों सिस्टम एक-दूसरे से कैसे अलग हैं
S-400 एक अधिक स्थापित और व्यापक रूप से तैनात सिस्टम है, जिसे रूस के लंबी दूरी के हवाई-रक्षा नेटवर्क के एक बड़े हिस्से के रूप में डिजाइन किया गया है। S-500 एक अधिक विशेष सिस्टम है, जिसे जटिल बैलिस्टिक मिसाइल खतरों और संभवतः 'नियर-स्पेस' (अंतरिक्ष के करीब की ऊंचाई) वाले लक्ष्यों के खिलाफ सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाया गया है।




















