मार्को रुबियो बोले- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, भारत की चिंताओं के लिए उससे बातचीत जरूरी

वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की जरूरत बताई है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका को उससे बातचीत करनी पड़ती है। रुबियो के मुताबिक, पाकिस्तान से बातचीत के जरिए उन गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है।
पाकिस्तान से बातचीत जरूरी क्यों?
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। रुबियो के मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान से बातचीत कर सकता है, तो इससे ऐसी गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंता है।
आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिका
रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत को इसी संदर्भ में जरूरी बताया। उनके बयान के मुताबिक, अमेरिका का उद्देश्य अपने राजनयिक संबंधों का इस्तेमाल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए करना है। हालांकि, पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने को लेकर भारत की चिंताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
ईरान के नेतृत्व पर रुबियो ने उठाए सवाल
अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान की सरकार और उसके नेतृत्व की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान में कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का प्रभाव है, जिसके कारण वहां की सरकार के साथ समझौते तक पहुंचना मुश्किल होता है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सभी शिया धर्मगुरुओं के लिए नहीं, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं के लिए है, जिनकी विचारधारा ईरान की नीतियों को प्रभावित करती है। उन्होंने ईरान पर आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल एवं ड्रोन कार्यक्रमों पर संसाधन खर्च करने का आरोप भी लगाया।
होर्मुज में तेल की सप्लाई पर क्या बोले रुबियो?
रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के 80 से 100 प्रतिशत तक बनी हुई है। उन्होंने ईरान पर ऐसे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। रुबियो ने कहा कि इन हमलों से जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान खतरे में पड़ती है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया को समुद्री व्यापार पर होने वाले हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
भारतीय नाविकों की मौत का किया जिक्र
रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे गए ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है, लेकिन कुछ हमले नुकसान पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। उन्होंने इन हमलों में भारतीय नाविकों की मौत का भी जिक्र किया। रुबियो के मुताबिक, समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं, इसलिए इन घटनाओं का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ता है।
ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखेगा अमेरिका
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन तैयार करने में कर रहा है। रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने, समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को अपनी विदेश नीति के अहम हिस्से के रूप में देख रहा है।




















