प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मिलने वाले एक क्लेम के लिए एक मां को पूरे 10 साल तक इंतजार करना पड़ा लेकिन आखिरकार उसे न्याय मिल गया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के फैसले को पलटते हुए मृत युवक की मौत को दुर्घटना माना और बीमा कंपनी को क्लेम राशि ब्याज और जुर्माने सहित देने का आदेश दिया है।
मामला राजगढ़ जिले का है जहां गंगा बाई के बेटे का बैंक में बचत खाता था और उसी के तहत उसका प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में दुर्घटना बीमा हुआ था। 30 अक्टूबर 2015 को युवक की कुएं में डूबने से मौत हो गई थी। जब मां ने बीमा क्लेम किया तो बीमा कंपनी ने इस घटना को आत्महत्या बताते हुए दावा खारिज कर दिया जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
ये भी पढ़ें: रीवा में क्रूर हत्या : महिला के दोनों हाथ तोड़े, घर के पीछे मिला सिर कटा शव; 3 थानों की पुलिस ने चलाया सर्च ऑपरेशन
शुरुआत में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद गंगा बाई ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। सुनवाई के दौरान महिला ने बताया कि उसके बेटे को मिर्गी के दौरे पड़ते थे और इसी कारण वह कुएं में गिर गया था। मेडिकल रिकॉर्ड और ग्रामीणों के बयान के आधार पर राज्य आयोग ने माना कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि दुर्घटना थी।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को पहले ही मुआवजा मिल जाना चाहिए था। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी दो महीने के भीतर 2 लाख रुपए की बीमा राशि 9% ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा मानसिक कष्ट और परिवाद खर्च के रूप में 15 हजार रुपए अतिरिक्त देने होंगे।
ये भी पढ़ें: भोपाल मेट्रो ने पकड़ी रफ्तार: 24 मीटर नीचे उतरी ‘दुर्गावती’, शुरू हुई अंडरग्राउंड टनल की खुदाई
इस योजना के तहत बैंक खाताधारकों को सालाना सिर्फ 20 रुपए के प्रीमियम पर 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम में आम लोगों को सुरक्षा देना है, लेकिन इस मामले ने बीमा क्लेम प्रक्रिया की चुनौतियों को भी उजागर कर दिया है।