इंदौर में ट्रैफिक नियम तोड़े, जुर्माना जमा करना भूले! 88 हजार चालान लंबित, 2.70 करोड़ बाकी

इंदौर। शहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की संख्या पर नजर रखने के लिए चौराहों पर लगे कैमरे लगातार ई-चालान काट रहे हैं, लेकिन चालान कटने के बाद जुर्माना जमा कराने में लोग पीछे हैं। पिछले तीन महीनों के आंकड़े इसकी तस्वीर साफ करते हैं। जून, जुलाई और अगस्त में इंदौर में कुल 97,088 ई-चालान बनाए गए। इन पर 2 करोड़ 96 लाख 99 हजार 400 रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन इनमें से 88,354 चालान अब भी लंबित हैं।इन लंबित चालानों से करीब 2 करोड़ 70 लाख 43 हजार 600 रुपये की वसूली बाकी है। यानी तीन महीने में जारी हुए कुल ई-चालानों में करीब 91 प्रतिशत का जुर्माना अब तक जमा नहीं हुआ। इसी अवधि में सिर्फ 8,721 चालानों का भुगतान किया गया और इससे यातायात पुलिस को 26 लाख 55 हजार 800 रुपये मिले।
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इंदौर में ई-चालान की स्थिति
| आंकड़ा | संख्या/राशि |
|---|---|
| कुल ई-चालान (जून–अगस्त) | 97,088 |
| लंबित ई-चालान | 88,354 |
| भुगतान किए गए चालान | 8,721 |
| कुल जुर्माना | ₹2.97 करोड़ |
| लंबित जुर्माना | ₹2.70 करोड़ |
| वसूल की गई राशि | ₹26.56 लाख |
| लंबित चालानों का प्रतिशत | लगभग 91% |
| 1 अप्रैल–28 सितंबर तक कुल चालान | 2,25,293 |
| इसी अवधि का समन शुल्क | ₹6.46 करोड़ |
किन नियमों पर सबसे ज्यादा चालान
| यातायात उल्लंघन | चालान |
|---|---|
| बिना हेलमेट | 1,08,979 |
| गलत पार्किंग | 33,548 |
| नंबर प्लेट संबंधी उल्लंघन | 17,823 |
| संकेत उल्लंघन | 13,423 |
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कैमरे चालान काट रहे, लेकिन वसूली अटक रही
इंदौर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगे कैमरों के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है। बिना हेलमेट, गलत पार्किंग, नंबर प्लेट में गड़बड़ी और ट्रैफिक संकेतों का उल्लंघन जैसे मामलों में चालान बनाए जा रहे हैं। कार्रवाई का दायरा बढ़ने के बावजूद लंबित चालानों की बड़ी संख्या पुलिस के लिए वसूली की चुनौती बन गई है। 1 अप्रैल से 28 सितंबर के बीच इंदौर में कुल 2,25,293 चालान बनाए गए। इनमें समन शुल्क की राशि करीब 6.46 करोड़ रुपये रही। इस अवधि में बिना हेलमेट के 1,08,979, गलत पार्किंग के 33,548, नंबर प्लेट से जुड़े 17,823 और संकेत उल्लंघन के 13,423 चालान बनाए गए।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई चिंता
ई-चालान की लंबित वसूली का मामला अब देशभर में चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने ई-चालान के बकाया जुर्माने की वसूली को लेकर चिंता जताते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावी तरीके तलाशने का सुझाव दिया है। यह सुनवाई वर्ष 2012 से चल रही एस. राजशेखरन सड़क सुरक्षा जनहित याचिका के मामले में हुई। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुझाव दिया कि बकाया ई-चालान वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जुर्माना जमा होने तक आरसी के नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी और वाहन का मालिकाना हक स्थानांतरित करने जैसी सेवाओं पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है।इसके अलावा फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने तथा ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या निलंबन से जुड़े विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही गई। कोर्ट ने ई-चालान की राशि बिजली बिल के साथ वसूलने का सुझाव भी दिया है।
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मध्यप्रदेश में 262 करोड़ से ज्यादा बकाया
मध्यप्रदेश में भी ई-चालान की लंबित वसूली बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2021 से 30 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 262.38 करोड़ रुपये की ई-चालान राशि बकाया थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए सख्त उपायों के लागू होने पर लंबित चालानों की वसूली तेज करने की उम्मीद है।
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इंदौर में लागू होने पर तत्काल कार्रवाई
यातायात विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर मध्यप्रदेश में यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो इसे इंदौर में भी तत्काल लागू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इससे लंबित चालानों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक संतोष कुमार कौल के मुताबिक, इंदौर के चौराहों पर लगे कैमरों से लगातार चालान बनाए जा रहे हैं। साथ ही विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। नई वसूली व्यवस्था लागू होने पर लंबित चालानों पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जाएगा।


















