Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

इंदौर सराफा बाजार से .. 7 बंगाली कारीगर एक करोड़ का सोना लेकर फरार

Follow on Google News
इंदौर सराफा बाजार से .. 7 बंगाली कारीगर एक करोड़ का सोना लेकर फरार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर — शहर के सराफा कारोबार में इन दिनों एक ऐसी सनसनी फैल गई है, जिसने हर ज्वेलर को चौंका दिया है। करीब एक करोड़ रुपए कीमत का सोना लेकर सात बंगाली कारीगर रातों-रात इंदौर से गायब हो गए,  शिकायत ओम विहार कॉलोनी निवासी गणेश पिता नीति ने दर्ज कराई है, जो ‘गणेश ज्वेलर्स’ के नाम से सर्राफा में दुकान संचालित करते हैं। गणेश के अनुसार, उनकी दुकान पर लंबे समय से बंगाल के कई कारीगर काम करते थे—संतु मांझी, माणिक सामाता, कार्तिक भाई, अनिल, सुदीप मोडोला, तपोस, तापस, पोलास भाई, विजेंद्र और विश्वास।

    इन्हीं कारीगरों ने मिलकर सोने की बीसी (कमेटी) फंड स्कीम शुरू की थी। सराफा बाजार में ये फंड 12 महीने की अवधि के लिए चलता था, जिसमें हर महीने सोना इकट्ठा कर आभूषण बनाने के लिए कारीगरों को दिया जाता था। इसी बहाने इन कारीगरों के पास करीब 900 ग्राम सोना जमा हो गया। लेकिन खेल यहीं पलट गया। कुछ दिन पहले सातों कारीगर दुकान से ऐसे गायब हुए जैसे हवा में उड़ गए हों। न फोन उठाया, न कोई सराग छोड़ा। फंड का पूरा सोना समेटकर यह पूरा गिरोह इंदौर से फरार हो गया। शहर के सराफ़ा व्यापारियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि मामला सिर्फ चोरी का नहीं बल्कि “पहले भरोसा जीतकर बाद में माल समेटने” वाली सुनियोजित चाल जैसा दिख रहा है।

    ज्वेलर गणेश ने आरोप लगाया है कि सोना आभूषण बनाने के नाम पर लिया गया था, लेकिन जैसे ही फंड में बड़ा अमाउंट जमा हुआ—उत्तम, सोमिल और कार्तिक सहित अन्य कारीगर पूरी रकम (900 ग्राम सोना) लेकर भाग निकले। शिकायत सीधे पुलिस आयुक्त तक पहुंच चुकी है। जिसके बाद पुलिस अब इस बंगाली कारीगर गिरोह की तलाश में जगह-जगह छापे मार रही है। सराफा बाजार में इस घटना के बाद से व्यापारी सतर्क हो गए हैं, और अंदरखाने ये चर्चा तेज है कि ये कोई लोकल नेटवर्क की मदद से रची गई सुनियोजित सोना-फरारी की बड़ी साजिश भी हो सकती है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है…और सराफा व्यापारियों की आंखों में सिर्फ एक ही सवाल— “क्या भरोसे का सोना अब हाथ से फिसल चुका है?”

     

     7 महीनों में 2.5 करोड़ का सोना साफ़, 50 से ज़्यादा व्यापारी लुटे 

    इंदौर — शहर का सराफा मार्केट इस वक्त सोना नहीं, बल्कि सोना-लुटेरों का हॉटस्पॉट बन चुका है। पिछले सात महीनों में 50 से अधिक व्यापारियों के 2.5 करोड़ रुपए से ज़्यादा का सोना लेकर कई कारीगर हवा हो चुके हैं। चार साल का हिसाब उठाकर देखें तो 200 से अधिक शिकायतें थाने तक पहुंचीं, पर हैरानी देखिए—एफआईआर महज़ 20। बाकी? फाइलों में धूल खा रही हैं… और व्यापारी रोज़ नए शिकार बन रहे हैं।

      कारीगर नहीं, ‘सोना क्लीनरगैंग!

    केस 1 — 30 लाख का सोना दियाकारीगर लियाकत 15 दिन बाद गायब

    व्यापारी आकाश जैन ने अप्रैल में कारीगर लियाकत को 30 लाख रुपए कीमत का सोना गहने बनाने के लिए दिया। टाइमलाइन क्लियर थी—15 दिन में काम डिलीवर।
    लेकिन 15 दिन बाद डिलीवरी नहीं… लियाकत ही डिलीट हो गया।

     

    केस 2 — 500 ग्राम सोना पचा गया, अरशद का फोन स्विच ऑफ सिंड्रोममें

    व्यापारी विकास ने 500 ग्राम सोना अरशद को दिया था।
    तीन महीने तक बस बन रहा है, बस हो रहा है” के बहाने दिए… फिर अरशद का फिंगरप्रिंट भी शहर से मिटा दिया गया।
    गहने गायब, कारीगर गायब, पैसा गायब सिर्फ नुकसान बाकी।

     

    केस 3 — 25 लाख की रकम, 340 ग्राम सोनाऔर कारीगर सुकरअली शेख ने उसी दिन से रास्ता बदल लिया

    ग्राहक सौरभ जैन ने 25 लाख रुपये सौंपकर 340 ग्राम सोने के गहने बनवाए थे।
    20 दिन बाद गहने मिलने थे, लेकिन 20वें दिन के बाद सुकरअली शेख का नाम भी हवा में उड़ गया।

     

    व्यापारियों का भी काला चेहरा कारीगरों पर उलटा केस!

    केस 4 — उदयपुर व्यापारी पर 4.5 किलो सोने की हेराफेरी का आरोप

    इंदौर के बंगाली कारीगरों ने उदयपुर व्यापारी पर 4.5 किलो सोने की धोखाधड़ी का आरोप लगाया।
    हिसाब मांगने गए कारीगरों के खिलाफ ही उदयपुर में अपहरण का फर्जी केस दर्ज करा दिया गया।
    अंदर की लड़ाई और ऊपर से खेल… दोनों तरफ गड़बड़।

     शहर में 15 हज़ार बंगाली कारीगर और 500 से ज़्यादा पहले से संदिग्ध

     दोनों मानते हैं कि शहर के 15 हजार बंगाली कारीगरों में से 2–5% यानी 500 से अधिक कारीगर गड़बड़ी में पकड़े गए हैं। यानी यह कोई इक्का-दुक्का चोरी नहीं—एक पैटर्न है, एक नेटवर्क है। संगठनों का दावा है कि हर कारीगर का पूरा डेटा ऑनलाइन दर्ज है—नाम, पता, आधार, बंगाल का पता, परिवार सब। लेकिन अध्यक्ष खुद मानते हैं: मुर्शिदाबाद, 24 परगना, मालदाइन इलाकों से फर्जी दस्तावेजों पर बांग्लादेशी लोगों के आने का खतरा बढ़ रहा है।
    यह दावा पक्का नहीं, लेकिन शक इतना गहरा कि पुलिस भी अलर्ट है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

    Latest Posts