15 करोड़ के लोन का झांसा, सड़क ठेकेदार से 1.45 करोड़ की साइबर ठगी

इंदौर। कारोबार बढ़ाने के लिए 15 करोड़ रुपये का कमर्शियल लोन लेने की कोशिश एक सड़क ठेकेदार को भारी पड़ गई। साइबर ठगों ने खुद को प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर ऐसा जाल बिछाया कि पीड़ित से अलग-अलग मदों के नाम पर 1 करोड़ 45 लाख रुपये वसूल लिए। रकम लेने के बाद न तो लोन मिला और न ही पैसे वापस किए गए। मामले की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस को आशंका है कि यह एक अंतरराज्यीय हाई-प्रोफाइल गिरोह है, जिसके तार कई प्रभावशाली लोगों तक जुड़े हो सकते हैं।
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एडिशनल डीसीपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया के अनुसार पीड़ित पीयूष गुर्जर सड़क निर्माण का व्यवसाय करते हैं। कारोबार विस्तार के लिए उन्हें 15 करोड़ रुपये के ऋण की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने गूगल पर लोन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की जानकारी तलाशनी शुरू की। इसी दौरान उनका संपर्क खुद को डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) बताने वाले कुछ लोगों से हुआ।
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आरोपियों ने खुद को 'पेंसी फिनवेस्ट' और 'कोर्सा फाइनेंस' जैसी वित्तीय कंपनियों का प्रतिनिधि बताते हुए पीयूष को 15 करोड़ रुपये तक का लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया। विश्वास जीतने के लिए उन्हें चेन्नई स्थित कार्यालय बुलाया गया, जहां बाकायदा बैठक कराई गई और कंपनी का सेटअप भी दिखाया गया।
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इसके बाद आरोपियों ने लोन प्रक्रिया के नाम पर अग्रिम ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, सर्विस चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉजिट, निरीक्षण शुल्क सहित विभिन्न मदों के नाम पर किस्तों में 1.45 करोड़ रुपये चेन्नई और हैदराबाद के अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा लिए। जांच में सामने आया कि खातों में रकम पहुंचते ही उसे तुरंत निकाल लिया गया।
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ठग लगातार पीड़ित को भरोसा दिलाते रहे कि लोन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और डिमांड ड्राफ्ट (DD) तैयार हो चुका है। बैंक से पुष्टि होने जैसी बातें कहकर वे उसे आश्वस्त करते रहे। लेकिन पूरी रकम लेने के बाद आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क समाप्त कर दिया।
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एक और कारोबारी को बना चुके हैं शिकार
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी गिरोह ने पहले एक अन्य कारोबारी के साथ भी इसी तरह 10 करोड़ रुपये की ठगी की थी। उस मामले में अधिवक्ता रोहित जैन ने न्यायालय के माध्यम से पीड़ित की राशि वापस दिलवाई थी। इसके बाद पीयूष गुर्जर सामने आए और उन्होंने भी इसी गिरोह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।












