'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर उड़ाए 45 लाख:साइबर ठग अहमदाबाद से गिरफ्तार

इंदौर। सेवानिवृत्त रेलवे मंडल संरक्षा अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 45 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को राज्य साइबर सेल ने गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हीरल कंसारा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपने नाम से कई कंपनियां पंजीकृत कर रखी थीं, जिनके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
ये भी पढ़ें: IMD का अलर्ट: अगले 7 दिन भारी पड़ सकते हैं! देशभर में बारिश का रेड अलर्ट, कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
राज्य साइबर सेल के एसपी सव्यसाची सराफ ने बताया कि पीड़ित सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी ने पिछले वर्ष 9 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी। उनके बच्चे विदेश में रहते हैं। शिकायत के अनुसार, उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि अधिकारी के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया गया है।
इसके बाद साइबर ठगों ने कथित गिरफ्तारी वारंट का भय दिखाकर पीड़ित को स्काइप वीडियो कॉल पर करीब 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उनसे उनकी चल और अचल संपत्तियों की पूरी जानकारी ली गई और लगातार दबाव बनाकर अलग-अलग बैंक खातों में 45 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
ये भी पढ़ें: Iran-America War: सीजफायर खत्म होते ही अमेरिका का एक्शन! ईरान के रेलवे ब्रिज समेत कई सैन्य ठिकानों पर हमला
शिकायत मिलते ही राज्य साइबर सेल ने संदिग्ध बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराया। बैंक लेन-देन की जांच के बाद पुलिस ने 15 लाख रुपये की राशि पीड़ित को वापस दिला दी। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों की जांच के आधार पर अहमदाबाद में दबिश देकर आरोपी हीरल कंसारा को गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ अहमदाबाद, वडोदरा और हरियाणा में भी साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
ये भी पढ़ें: CG NEWS: बोधघाट थाना बना छत्तीसगढ़ का नंबर-1 पुलिस थाना, पहली बार बस्तर को मिला राष्ट्रीय सम्मान।
राज्य साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी, पुलिस या जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।












