सीहोर:यूट्यूब रील से शुरू हुआ 41.60 लाख की साइबर ठगी का खेल, फर्जी इन्वेस्टमेंट एप ने LIC अधिकारी को फंसाया

सीहोर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया पर दिखाई गई एक निवेश संबंधी रील ने एलआईसी के विकास अधिकारी को 41.60 लाख रुपये गंवाने पर मजबूर कर दिया। साइबर ठगों ने फर्जी निवेश एप, व्हाट्सएप चैट और आईपीओ में भारी मुनाफे का लालच देकर विश्वास जीता और फिर लाखों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यूट्यूब रील बनी साइबर जाल की पहली कड़ी
कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार चाणक्यपुरी निवासी एवं एलआईसी के विकास अधिकारी संदीप कुमार द्विवेदी ने शिकायत दर्ज कराई कि 22 मई 2026 को वह यूट्यूब पर रील देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें "मेग्नम इक्विटी" नाम से निवेश का विज्ञापन दिखाई दिया। रील में कम समय में अधिक मुनाफे का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करते ही वह सीधे व्हाट्सएप चैट से जुड़ गए, जहां खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोगों ने उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी संस्था IPO, FPO, OTC और AI आधारित निवेश के जरिए शानदार रिटर्न दिलाती है। इसी दौरान शिकायतकर्ता से एक मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया और निवेश शुरू करवाया गया।
IPO और AI निवेश के नाम पर जमा कराए लाखों रुपये
शुरुआत में लगातार भरोसा दिलाकर साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता का विश्वास जीत लिया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से रकम जमा कराई गई। पुलिस के अनुसार 8 जून को 6 लाख रुपये, 9 जून को 14 लाख रुपये, 12 जून को 15 लाख 60 हजार रुपये तथा 1 जुलाई को 6 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इस तरह कुल 41 लाख 60 हजार रुपये साइबर ठगों के खातों में पहुंच गए। पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप और व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित होती रही, जिससे शिकायतकर्ता को सब कुछ वास्तविक निवेश जैसा प्रतीत होता रहा।
रैंकिंग और इनाम का झांसा देकर बढ़ाया भरोसा
साइबर अपराधियों ने केवल निवेश का लालच ही नहीं दिया बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से शिकायतकर्ता का विश्वास भी मजबूत किया। उन्होंने बताया कि जो निवेशक सबसे अधिक राशि लगाएगा, उसकी रैंकिंग बेहतर होगी और उसे विशेष इनाम मिलेगा। इसी भरोसे को मजबूत करने के लिए 24 जून को शिकायतकर्ता की पत्नी प्रियंका द्विवेदी के बैंक खाते में 50 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए गए। इस रकम को देखकर शिकायतकर्ता को लगा कि निवेश सुरक्षित है और लाभ मिलना शुरू हो गया है। इसी विश्वास के कारण वह लगातार बड़ी रकम जमा करता चला गया।
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फर्जी IPO अलॉटमेंट दिखाकर मांगे 22 लाख रुपये
6 जुलाई को आरोपियों ने एप में Lloyds Metals and Energy Limited के IPO का अलॉटमेंट दिखाया। एप में निवेश और लाभ जोड़कर बड़ी राशि दिखाई गई लेकिन खाते में 22 लाख रुपये का माइनस बैलेंस दर्शाया गया। आरोपियों ने कहा कि यदि यह राशि जमा नहीं की गई तो पूरा निवेश सेबी द्वारा जब्त कर लिया जाएगा और निकासी भी संभव नहीं होगी। लगातार दबाव बनाए जाने पर शिकायतकर्ता ने अपने बैंक प्रबंधक से सलाह ली। बैंक मैनेजर ने तुरंत इसे साइबर ठगी बताते हुए आगे कोई राशि जमा नहीं करने और पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी।
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पुलिस ने दर्ज किया केस, लोगों को दी सावधानी की सलाह
बैंक की सलाह के बाद शिकायतकर्ता ने कोतवाली थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। जांच में प्रथम दृष्टया साइबर धोखाधड़ी पाए जाने पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। कोतवाली टीआई रविंद्र यादव ने बताया कि व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों, मोबाइल एप, ट्रांजेक्शन डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश संबंधी विज्ञापनों, अनजान लिंक और फर्जी एप्स पर भरोसा न करें तथा किसी भी निवेश से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच अवश्य करें।
Edited By: Sumit Shrivastava












