इंदौर में पानी की एक-एक बूंद का हिसाब लेगा निगम!बर्बादी की तो पहली गलती पर 2 हजार, तीसरी बार में 10 हजार का जुर्माना

इंदौर - इंदौर में पानी की बर्बादी करने वालों की अब खैर नहीं! घर के बाहर कार धोना हो या नल की पाइपलाइन में मोटर लगाकर पानी खींचना, ऐसी हरकतें अब जेब पर भारी पड़ेंगी। संभावित जलसंकट से पहले नगर निगम ने पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। सोमवार को हुई महापौर परिषद (एमआईसी) की बैठक में नई जल नीति को हरी झंडी दे दी गई। इसके तहत पानी का दुरुपयोग करने पर पहली बार दो हजार, दूसरी बार पांच हजार और तीसरी बार से 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, पाइपलाइन में मोटर लगाकर पानी खींचने वालों को पहली गलती पर ही पांच हजार रुपये भरने होंगे। बार-बार नियम तोड़ने पर यह राशि 10 हजार रुपये हो जाएगी। निगम ने अवैध नल कनेक्शन वालों को भी चेतावनी दे दी है। 12 नवंबर से 21 दिन का विशेष अभियान चलाकर कनेक्शनों की जांच की जाएगी।
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कार धोने में पानी बहाया तो सीधे जेब पर पड़ेगी मार
नगर निगम ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब जुर्माने का डंडा चलाने की तैयारी कर ली है। नई जल नीति के तहत नर्मदा और बोरिंग के पानी का गैरजरूरी इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। घरों के बाहर पेयजल से कार धोने, सार्वजनिक जल संसाधनों का दुरुपयोग करने और अन्य गतिविधियों में पानी बहाने वालों पर निगम की नजर रहेगी।ऐसे मामलों में पहली बार नियम तोड़ने पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी आदत नहीं सुधरी तो दूसरी बार पांच हजार और तीसरी बार से प्रत्येक उल्लंघन पर 10 हजार रुपये वसूले जाएंगे। निगम का मानना है कि केवल अपील और समझाइश से पानी की बर्बादी नहीं रुकेगी, इसलिए अब आर्थिक दंड के जरिए लोगों को नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाएगा।
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नल में मोटर लगाई तो पहली बार में ही 5 हजार का झटका
घरों में पानी का दबाव बढ़ाने के लिए कई लोग सीधे पाइपलाइन में मोटर लगा लेते हैं। इससे आसपास के दूसरे घरों में पानी का दबाव कम हो जाता है और कई परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। नगर निगम ने ऐसी गतिविधियों पर भी सख्ती करने का फैसला किया है।नई नीति के मुताबिक, पाइपलाइन में मोटर लगाकर पानी खींचते पकड़े जाने पर पहली बार पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद दोबारा ऐसा करने पर हर बार 10 हजार रुपये वसूले जाएंगे। निगम की टीमें ऐसे कनेक्शनों पर नजर रखेंगी और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेंगी।
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12 नवंबर से अवैध नल कनेक्शन वालों की शुरू होगी जांच
शहर में अवैध नल कनेक्शनों को लेकर भी नगर निगम ने बड़ा अभियान चलाने का फैसला किया है। 12 नवंबर से 21 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर लोगों को अपने अवैध कनेक्शन वैध कराने का मौका दिया जाएगा।इस अभियान के बाद निगम की टीमें घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगे नल कनेक्शनों की जांच करेंगी। जिनके यहां बिना अनुमति कनेक्शन पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम का मकसद जल वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित करना और पानी की चोरी व अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
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टैंकर संचालकों को सात दिन की मोहलत, गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई
नगर निगम ने केवल आम नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि पानी के टैंकर चलाने वाली एजेंसियों पर भी शिकंजा कसने का फैसला किया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि निजी स्तर पर टैंकर संचालित करने वाले लोगों और एजेंसियों को अगले सात दिनों में अपनी व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।टैंकरों में लीकेज होने, पानी की आपूर्ति में लापरवाही बरतने या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। खास बात यह है कि नगर निगम के अपने अधिकारी, कर्मचारी और निगम द्वारा नियुक्त टैंकर संचालक भी इस व्यवस्था से बाहर नहीं रहेंगे। उनके स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
30 नए टैंकर खरीदेंगे, हर हाइड्रेंट पर लगेगा CCTV
गर्मी के दिनों में शहर के किसी भी इलाके में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए निगम टैंकरों की संख्या बढ़ाने जा रहा है। एमआईसी ने 30 से अधिक नए टैंकर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।इसके तहत 300 लीटर क्षमता वाले 11 नए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) टैंकर और आठ हजार लीटर क्षमता वाले 22 सीएनजी ट्रक टैंकर खरीदे जाएंगे। इसके अलावा सभी हाइड्रेंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों के जरिए पानी भरने और टैंकरों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि किस टैंकर ने कहां से पानी भरा और उसका वितरण किस तरह किया गया।
300 नए बोरिंग होंगे, 100 पुराने बोरिंग पर लगेंगे पंप
पेयजल के वैकल्पिक इंतजाम मजबूत करने के लिए निगम शहर में 300 नए बोरिंग कराएगा। इसके साथ ही पहले से मौजूद 100 बोरिंग पर पंप लगाए जाएंगे। इन फैसलों का उद्देश्य जरूरत के समय अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध कराना और टैंकरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है।
सफाई से लेकर सड़कों तक, एमआईसी बैठक में कई बड़े फैसले
नगर निगम मुख्यालय में सोमवार दोपहर शुरू हुई महापौर परिषद की बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली। इसमें जल प्रबंधन के अलावा शहर की सफाई, सड़क निर्माण, विज्ञापन व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई।
बैठक में लिए गए अन्य प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं-
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तीन हजार सफाईकर्मियों की भर्ती: शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तीन हजार नए स्वच्छताकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।
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1800 से अधिक कर्मचारियों का विनियमन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में 1800 से ज्यादा कर्मचारियों को विनियमित किया जाएगा। अन्य पात्र कर्मचारियों के मामलों में वरिष्ठता और वरीयता को आधार बनाया जाएगा।
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शहर में नए यूनिपोल पर रोक: अब इंदौर में नए यूनिपोल नहीं लगाए जाएंगे। इसके स्थान पर 140 नई गेंट्री बनाई जाएंगी, जिन पर निर्धारित शुल्क लेकर विज्ञापन लगाए जा सकेंगे।
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सरवटे से मच्छी बाजार तक सड़क: सरवटे बस स्टैंड से मच्छी बाजार चौराहे तक बची हुई सड़क के निर्माण के लिए निविदा जारी की जाएगी।
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एयरपोर्ट रोड से एमआर-5 तक लिंक रोड: एयरपोर्ट रोड को एमआर-5 से जोड़ने वाली लिंक रोड विकसित की जाएगी।
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छोटा बांगड़दा तक सड़क: एमआर-5 पर टाटा स्टील चौराहे से छोटा बांगड़दा गांव तक सड़क बनाई जाएगी।
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केसरबाग फ्लाइओवर के नीचे स्मार्ट हब: फ्लाइओवर के नीचे की जमीन पर पीपीपी मॉडल के तहत स्मार्ट हब मल्टी स्पोर्ट्स एवं रिक्रिएशनल फैसिलिटी विकसित की जाएगी।


















