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भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, सोमालिया तट पर 48 घंटे से ज्यादा चले अभियान में अपहृत नाव के 20 मछुआरों को सुरक्षित बचाया

युद्धपोत, मरीन कमांडो, निगरानी विमान और वायुसेना के C-17 की मदद से सशस्त्र समुद्री लुटेरों को किया ढेर, 'अजिनी' नाव को मदर शिप बनने से रोका।
भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, सोमालिया तट पर 48 घंटे से ज्यादा चले अभियान में अपहृत नाव के 20 मछुआरों को सुरक्षित बचाया
मछली पकड़ने वाली नाव के सभी 20 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया।

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास एक बड़ा और सटीक ऑपरेशन चलाकर अपहरण की गई मछली पकड़ने वाली नाव के सभी 20 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया। 48 घंटे से अधिक समय तक चला यह समन्वित अभियान नौसेना के युद्धपोत, समुद्री निगरानी विमान, मरीन कमांडो और भारतीय वायु सेना (IAF) के C-17 विमान की मदद से पूरा किया गया। समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि नौसेना ने पहले अपहृत नाव को ट्रैक किया, फिर उसकी मूवमेंट को रोककर सशस्त्र समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए रणनीतिक कार्रवाई की। इस दौरान चालक दल के सभी 20 सदस्यों को बिना किसी नुकसान के बचा लिया गया। ऑपरेशन में कोई भी हताहत या घायल नहीं हुआ।

 नाव को 'मदर शिप' के तौर पर इस्तेमाल कर सकते थे लुटेरे

जानकारी के अनुसार, 'अजिनी' (Azini) नाम की यह फिशिंग बोट पिछले महीने एक हथियारबंद समुद्री लुटेरे गिरोह ने हाईजैक कर ली थी। इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। क्योंकि आशंका थी कि लुटेरे इस नाव को 'मदर शिप' के तौर पर इस्तेमाल करके इस रूट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले कर सकते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने तुरंत एक युद्धपोत और समुद्री निगरानी विमान को तैनात कर अपहृत नाव की तलाश शुरू कर दी। इस पूरे मिशन में लगातार निगरानी, कोऑर्डिनेटेड ट्रैकिंग और नाव को सुरक्षित कब्जे में लेने के लिए मरीन कमांडो की तैनाती शामिल रही।

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नौसेना ने कैसे नाकाम किया लुटेरों का प्लान

यह ऑपरेशन कई चरणों में पूरा किया गया, जिसमें नौसेना और वायुसेना ने मिलकर काम किया। पहले अपहृत नाव का पता लगाया गया, फिर उसकी आवाजाही को सीमित किया गया और आखिर में उसे सुरक्षित रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया गया।

1. अपहरण की सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत एक युद्धपोत को इस मिशन पर लगाया। हवाई निगरानी और सपोर्ट के लिए एक समुद्री गश्ती विमान को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया। इन दोनों ने मिलकर 'अजिनी' (Azini) की लगातार ट्रैकिंग की और उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया।

इस चरण में उनके प्रमुख कार्य इस प्रकार रहे

युद्धपोत और निगरानी विमान ने संयुक्त प्रयास से हाईजैक हुई फिशिंग बोट का पता लगाया। समुद्री लुटेरों को भागने से रोकने के लिए लगातार सर्विलांस रखा गया और जहाज की हर मूवमेंट पर कड़ी नजर रखी गई। नौसेना ने जहाज को एक ही जगह पर रोकने और उसे दूर ले जाने से रोकने के लिए बिना बल प्रयोग वाले विशेष उपायों (non-kinetic measures) का इस्तेमाल किया। इस ऑपरेशन में नॉन-काइनेटिक तरीकों का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इनका उद्देश्य सीधे तौर पर ताकत का प्रयोग किए बिना जहाज की आवाजाही को नियंत्रित करना था। हालांकि नौसेना ने यह खुलासा नहीं किया है कि इसके लिए किन खास उपकरणों या तकनीकों का प्रयोग किया गया।

 2. इस मिशन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मरीन कमांडो (MARCOS) को मैदान में उतारा गया। भारतीय वायुसेना (IAF) के C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए कमांडो को सटीक एयरड्रॉप किया गया। इससे भारतीय नौसेना और वायुसेना की संयुक्त ऑपरेशनल ताकत का प्रदर्शन हुआ। कमांडो की यह तैनाती अपहृत मछली पकड़ने वाली नाव को सुरक्षित कब्जे में लेने और हथियारबंद समुद्री लुटेरों के खतरे को खत्म करने की समन्वित योजना का हिस्सा थी।

 3. नौसेना की निर्णायक रणनीतिक कार्रवाई 'अजिनी' की लोकेशन का पता लगाने और उसे एक जगह पर रोकने के बाद भारतीय नौसेना ने तेज और सुनियोजित रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम दिया। ऑपरेशन के अंतिम चरण में नौसेना ने फिशिंग बोट को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया और समुद्री लुटेरों के खतरे को पूरी तरह नाकाम कर दिया।

 अजिनी का अपहरण समुद्री सुरक्षा के लिए क्यों था बड़ा खतरा

अजिनी का हाईजैक होना सिर्फ उस मछली पकड़ने वाली नाव और उसके 20 क्रू मेंबर्स के लिए ही खतरा नहीं था। इससे कहीं बड़ी चिंता यह थी कि समुद्री लुटेरे इस नाव का इस्तेमाल आगे और बड़े हमलों को अंजाम देने के लिए कर सकते थे। नौसेना के अनुसार, आशंका थी कि समुद्री लुटेरे अजिनी को एक 'मदर शिप' के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। एक 'मदर शिप' समुद्री लुटेरों के लिए समंदर में दूर तक ऑपरेट करने के लिए एक चलते-फिरते बेस की तरह काम करती है। यह उन्हें मुख्य समुद्री मार्गों पर मौजूद व्यापारिक जहाजों के करीब पहुंचने और उन पर हमले करने में मदद करता है। अजिनी का इस तरह इस्तेमाल होने की संभावना समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर खतरा थी, खासकर उस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए। नाव को सुरक्षित कब्जे में लेकर और समुद्री लुटेरों के खतरे को खत्म करके भारतीय नौसेना ने इसे भविष्य में होने वाले हमलों के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल होने से रोक दिया।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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