हनी ट्रेप का ब्लूप्रिंट हुआ कोर्ट पेशी पर तैयार:फिर श्वेता-अलका-रेशु की जोड़ी ने रचा बड़ा जाल!

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप-2026 मामले में अब रोज नए और सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। एक कारोबारी को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की वसूली की कोशिश करने वाले गिरोह की परतें खुलने लगी हैं। पुलिस ने मामले में श्वेता विजय जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी, कथित पत्रकार जितेंद्र पुरोहित और इंटेलिजेंस शाखा के प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया है। जांच में अब जो कहानी सामने आ रही है, उसने पूरे मामले को और हाईप्रोफाइल बना दिया है।\
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जेल में हुई मुलाकात, ब्लूप्रिंट हुआ कोर्ट पेशी पर तैयार
सूत्रों के अनुसार श्वेता जैन की मुलाकात इंदौर निवासी अलका दीक्षित से जेल में हुई थी। बताया जा रहा है कि नवंबर माह में कोर्ट पेशी के दौरान दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। इसी दौरान अलका के पुराने नेटवर्क और कथित देह कारोबार से जुड़े संपर्कों पर चर्चा हुई। जब श्वेता को यह जानकारी लगी कि अलका पहले से ऐसे नेटवर्क में सक्रिय रही है, तब दोनों ने मिलकर “कुछ बड़ा” करने की योजना बनाई। सूत्रों के मुताबिक नवंबर और दिसंबर में जिला कोर्ट पेशी के दौरान कई बार बातचीत हुई और यहीं से हनीट्रैप गैंग का नया ब्लूप्रिंट तैयार हुआ।
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“नया चेहरा” तलाश रही थी गैंग
पुलिस सूत्रों के मुताबिक श्वेता और अलका ऐसे चेहरे की तलाश में थीं, जिसका नाम पहले किसी विवाद या हनीट्रैप मामले में सामने नहीं आया हो। इसी तलाश में रेशु चौधरी को नेटवर्क में शामिल किया गया। बताया जा रहा है कि श्वेता को पहले से जानकारी थी कि रेशु की पहुंच बड़े राजनीतिक चेहरों तक है और वह लगातार नेताओं के संपर्क में रहती है।
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भोपाल से दिल्ली और गुजरात तक राजनीतिक पहुंच
सूत्रों के अनुसार रेशु चौधरी चुनाव प्रचार, राजनीतिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों के बहाने भोपाल, दिल्ली और गुजरात तक लगातार सक्रिय रहती थी।बताया जा रहा है कि उसकी कई बड़े नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंच थी। राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान उसकी मुलाकातें कई प्रभावशाली लोगों से होती थीं।जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने किन-किन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों को अपने जाल में फंसाया।
“कितनों को फंसाया?” पुलिस अभी खामोश
सूत्रों का दावा है कि रेशु की लंबे समय तक राजनीतिक गलियारों में अच्छी घुसपैठ रही। हालांकि जांच अधिकारी फिलहाल इस बात का खुलासा करने से बच रहे हैं कि गैंग ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया था।पुलिस मोबाइल डेटा, चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और सोशल मीडिया कनेक्शन खंगाल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाईप्रोफाइल नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।




















