MP में अब खुलेंगे विशेष मीडिएशन सेंटर:पारिवारिक विवाद सुलझाने में मददगार बने स्पेशल काउंसलर, पिछले साल 134 मामलों में ली गई एक्सपर्ट की मदद

मध्य प्रदेश में अब विशेष मीडिएशन सेंटर खुल रहे हैं जो पारिवारिक विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पिछले साल 134 मामलों में एक्सपर्ट काउंसलरों की मदद से कई परिवारों को राहत मिली है।
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पारिवारिक विवाद सुलझाने में मददगार बने स्पेशल काउंसलर, पिछले साल 134 मामलों में ली गई एक्सपर्ट की मदद

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मध्यप्रदेश में पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए स्पेशल काउंसलर और एक्सपर्ट्स की मदद असरदार साबित हो रही है। पिछले साल प्रदेश में ऐसे 134 मामले सामने आए जिनमें विशेष विशेषज्ञों की सहायता ली गई। इनमें से करीब 93 मामलों में सफल सुलह भी हुई। इन सकारात्मक नतीजों को देखते हुए अब प्रदेशभर में स्पेशल मीडिएशन सेंटर खोलने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स को ट्रेनिंग देकर विशेष टीम तैयार की जाएगी।

हाईकोर्ट की पहल पर शुरू हुई नई व्यवस्था

हाईकोर्ट की पहल पर इस योजना को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चीफ जस्टिस संदीप सचदेवा की पहल और जस्टिस विवेक रूसिया की मॉनिटरिंग में एक्सपर्ट टीम तैयार की जा रही है। भोपाल के महिला थाने में सांकेतिक संवाद मध्यस्थता केंद्र की शुरुआत भी की जा चुकी है जहां विशेष परिस्थितियों वाले मामलों में एक्सपर्ट की मदद से काउंसलिंग की जा रही है।

साइन लैंग्वेज और मेडिकल एक्सपर्ट भी होंगे शामिल

इस विशेष टीम में पुरुष और महिला साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट, स्पेशल चाइल्ड ट्रेनर, काउंसलर, मेडिकल एक्सपर्ट और अन्य विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक अब तक 20 से ज्यादा एक्सपर्ट्स का चयन किया जा चुका है और उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई है। फिलहाल सबसे ज्यादा सदस्य इंदौर से हैं जबकि भोपाल से चार विशेषज्ञों को टीम में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा जबलपुर समेत अन्य शहरों से भी एक्सपर्ट जोड़े जाएंगे।

केस-1: स्पेशल चाइल्ड के कारण टूटने वाला परिवार बचा

भोपाल में एक दंपति स्पेशल चाइल्ड के जन्म के बाद तलाक लेने जा रहा था। स्थिति यह थी कि दोनों में से कोई भी बच्चे की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। मामले में स्पेशल चाइल्ड काउंसलर कला मोहन ने दोनों को समझाया कि सही देखभाल और परिवार का सहयोग बच्चे को सामान्य जीवन से जोड़ सकता है। काउंसलिंग के बाद दोनों ने साथ रहने और बच्ची की परवरिश मिलकर करने का फैसला लिया।

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केस-2: मूक-बधिर दंपति का रिश्ता फिर जुड़ा

इंदौर में एक मूक-बधिर कपल के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला तलाक तक पहुंच गया। बाद में साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद से दोनों की काउंसलिंग कराई गई। काउंसलिंग के बाद दोनों फिर साथ रहने लगे और अब पिछले 10 महीनों से खुशहाल जीवन जी रहे हैं। दंपति जल्द माता-पिता भी बनने वाले हैं।

केस-3: मेडिकल एक्सपर्ट ने दूर किया भ्रम

एक कैंसर सर्वाइवर महिला को उसका पति तलाक देना चाहता था क्योंकि उसे लगता था कि पत्नी कभी मां नहीं बन सकेगी। मामले में मेडिकल एक्सपर्ट ने दंपति को सही जानकारी दी और IVF जैसी तकनीकों के बारे में समझाया। इसके बाद दोनों के बीच गलतफहमी दूर हो गई।

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कोर्ट का दबाव कम करने की भी तैयारी

सुनीत अग्रवाल ने बताया कि कोशिश यही रहती है कि पारिवारिक मतभेद बातचीत और समझाइश से खत्म किए जाएं। हाल ही में शुरू किए गए मीडिएशन सेंटर के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि स्पेशल मामलों के लिए अलग व्यवस्था बनने से लोगों को आसानी से न्याय मिल सकेगा और अदालतों पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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