MP Infrastructure Projects :मप्र में द्वारका योजना से बनाई जाएंगी मास्टर प्लान की बड़ी सड़कें, पानी, सीवेज के काम भी होंगे

मप्र में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार शहरों में पेयजल, सड़क और सीवेज नेटवर्क के बड़े काम करेगी। शहरों के निर्माण कार्य और विकास में पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च की जाएगी।
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मप्र में द्वारका योजना से बनाई जाएंगी मास्टर प्लान की बड़ी सड़कें, पानी, सीवेज के काम भी होंगे
फाइल फोटो

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले स्थानीय चुनाव की तैयारियां सरकार ने अभी से शुरू कर दी है। शहरों में बड़ी सड़कों, पानी और सीवेज नेटवर्क के गैप फिलिंग तथा टूटे नेटवर्क पर सबसे ज्यादा काम किया जाएगा। शहरों की निर्माण कार्य और विकास में पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च की जाएगी। इस प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत विकास कार्य तीन साल में किए जाएंगे। इसके पूर्व में सरकार ने निकायों को कायाकल्प योजना के लिए 16 सौ करोड़ रुपए दिए थे। 

बारिश के बाद शुरू होंगे काम

द्वारका योजना के तहत शहरों में काम बारिश के बाद शुरू किए जाएंगे। इसके पहले निकायों को विकास योजना के रोड मैप तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें पानी के जहां पुराने नेटवर्क हैं, उनकी जगह पर नए नेटवर्क डाले जाएंगे। इन नेटवर्कों को तैयार करने के लिए अमृत योजना में प्रावधान नहीं होगा। प्रदेश में करीब 1 लाख स्थानों पर सीवेज और पानी की पाइप लाइनें या तो एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं या फिर एक दूसरे के पैरलल हैं।

शहर में बड़ी सड़कों का किया जाएगा निर्माण

इस योजना में शहर के मास्टर प्लान, मुख्य और बड़ी सड़कों का निर्माण होगा।  नगर निगमों में 18 मीटर, नगर पालिका में 14 और नगर परिषद में 7 मीटर की सड़कें बनाई जाएगी। जहां जलभराव की समस्या है, वहां सीमेंट और कांक्रीट तथा शेष जगह पर डामर की सड़कें बनाई जाएंगी। इसके निर्माण के साथ ठेकेदार को इनके रख-रखाव का पांच वर्ष तक जिम्मा दिया जाएगा। इसके अलावा उन सड़कों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा, जो एक कॉलोनी को दूसरे कॉलोनी के पहुंच मार्गों को जोड़ता है।

क्यों पड़ रही सीवेज और पानी लाइन की जरूरत

बड़े शहरों का लगातार विस्तार होता है। हर तीन से पांच वर्ष के अंदर परिसीमन के तरह गांवों और नई कॉलोनियों को जोड़ा दिया जाता है। यहां निकाय को सीवेज, पानी की नई लाइनें डालनी पड़ती है। इसके लिए भारत सरकार के JNNURRM, AMRUT 1 और 2 योजना शामिल नहीं किया गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि केन्द्र वित्तपोषित योजना और प्रस्ताव मंजूरी के बाद कई कॉलोनियों जोड़ दी जाती हैं। इन गैप को पाटने के लिए राज्य सरकार को राशि देनी पड़ती है।

गाइडलाइन हो रही तैयार

द्वारका योजना के तहत शहरों के निर्माण, विकास और सरकार की प्राथमिकता के कार्यों के लिए निकायों को पांच हजार करोड़ दिए जाएंगे। इसके लिए गाइडलाइन तैयार की जा रही है। इसमें मुख्य रूप से सड़क, सीवेज-पानी नेटवर्क सहित अन्य कामों के लिए राशि दी जाएगी। यह काम तीन साल में होगा।

संकेत भोंडवे, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास विभाग

सड़कों पर लगता है जाम

भोपाल मास्टर प्लान की कई सड़कें निर्धारित चौड़ाई के आधार पर बीस वर्ष बाद भी नहीं बन पाई हैं। मास्टर प्लान में सतगढ़ी क्षेत्र में बैरसिया और रायसेन की ओर 36 मीटर चौड़े प्रस्तावित मार्ग का उल्लेख है, लेकिन इसे नहीं बनाया गया। इसी के कारण शाम के समय वाहनों का जाम लगा रहता है। जिस तरह से शहर में वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसके अनुसार सड़कों की चौड़ाई नहीं बढ़ रही है।

प्रशांत सक्सेना, ई-8 आकाश गंगा कॉलोनी भोपाल 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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