Petrol-Diesel Price Hike:10 दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानिए आम आदमी की जेब पर कितना बढ़ा बोझ?

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार सुबह एक बार फिर तेल कंपनियों ने ईंधन के नए रेट जारी किए, जिसके बाद पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। बढ़ती कीमतों का असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और घरेलू बजट पर साफ दिखाई देने लगा है।
दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के करीब
नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं डीजल की कीमत 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण वाहन चालकों की परेशानी बढ़ रही है। कई लोग अब छोटी दूरी के लिए भी निजी वाहन की जगह बस और मेट्रो जैसे सार्वजनिक साधनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलाव का असर पूरे देश में दिखाई दे रहा है।
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10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम
मई महीने में ईंधन की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है। सबसे पहले 16 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम करीब 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इसके बाद 19 मई को फिर कीमतों में बढ़ोतरी हुई और अब शनिवार को तीसरी बार दाम बढ़ा दिए गए हैं। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं और अब ईंधन महंगा होने से अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के भीतर भी दिखाई देता है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर पेट्रोल और डीजल के दाम तय करती हैं। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर फल, सब्जी, दूध और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं। वहीं आम लोग पहले से बढ़ती महंगाई के बीच अब नए खर्चों को लेकर परेशान दिखाई दे रहे हैं।
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सरकार ने क्या कहा?
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कई जगह पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने लगी थी। इसे देखते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। तेल कंपनियां लगातार हालात पर नजर रख रही हैं और जरूरत के मुताबिक ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। लोगों से जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल खरीदने से बचने की अपील की गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। घरेलू बजट से लेकर बाजार तक, हर जगह इसका असर दिखाई देता है।











